सेल्फ-एस्टीम प्रशिक्षण से संवेदनशील बन रहे विद्यालय, शिक्षकों को दीक्षा पोर्टल पर मिल रहा अनिवार्य ऑनलाइन प्रशिक्षण

  • उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं केजीबीवी में कार्यरत अध्यापकों को किया जा रहा प्रशिक्षित
  • जूनियर, कम्पोजिट एवं केजीबीवी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग-अलग कोर्स निर्धारित
  • प्रथम चरण में 54,347 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने पूर्ण किया प्रशिक्षण, दूसरा चरण गतिशील
  • शिक्षा को सुरक्षा, समानता, स्वाभिमान और आत्मसम्मान से जोड़ने की पहल: मोनिका रानी

लखनऊ। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के निर्देशन एवं नेतृत्व में प्रदेश के विद्यालयों को संवेदनशील, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत सेल्फ-एस्टीम (Self-Esteem) आधारित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं को दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल पर अनिवार्य ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण विद्यालयों में केवल शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों (विशेषकर बालिकाओं) में आत्मसम्मान, स्वाभिमान, आत्मविश्वास, भावनात्मक सुरक्षा और समान सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बता दें कि यह प्रशिक्षण मई 2026 तक ओपन रहेगा, ताकि सभी पात्र शिक्षक-शिक्षिकाएं समयबद्ध रूप से इसे पूर्ण कर सकें। बेसिक शिक्षा मंत्री के निर्देशन में महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह प्रशिक्षण राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा निर्धारित एक्शन कैलेंडर के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। पूर्व में जारी आदेशों के क्रम में प्रथम चरण में 54,347 शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा Self-Esteem प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष शिक्षकों के लिए द्वितीय चरण का प्रशिक्षण वर्तमान में प्रगति पर है।

दो भागों में विभाजित है ट्रेनिंग कोर्स

यह प्रशिक्षण कोर्स शिक्षकों की भूमिका एवं विद्यालयीय संरचना के अनुसार दो भागों में विभाजित है। एक कोर्स कक्षा 6 से 8 तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों के लिए निर्धारित है, जबकि दूसरा कोर्स कम्पोजिट विद्यालयों एवं केजीबीवी में कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से तैयार किया गया है, जिससे प्रशिक्षण अधिक व्यावहारिक और प्रभावी हो सके।

स्वाभिमान, आत्मसम्मान और भावनात्मक सुरक्षा पर विशेष फोकस

Self-Esteem प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करना है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और स्वीकार्य महसूस करे। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक-शिक्षिकाओं को यह समझ विकसित कराई जा रही है कि कक्षा-कक्ष एवं विद्यालयी परिवेश में संवाद, व्यवहार और शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के आत्मसम्मान व स्वाभिमान को कैसे सुदृढ़ किया जाए। इसके साथ-साथ लैंगिक संवेदनशीलता, सकारात्मक व्यवहार और समान अवसरों को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण न पूरा करने वाले शिक्षकों के लिए सख्त निर्देश

राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा सभी जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिन शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अब तक प्रथम चरण का प्रशिक्षण पूर्ण नहीं किया है, उन्हें अनिवार्य रूप से द्वितीय चरण में प्रशिक्षण पूर्ण कराया जाए। साथ ही जिला समन्वयक बालिका शिक्षा को कार्यक्रम की सतत मॉनिटरिंग करते हुए राज्य परियोजना कार्यालय को नियमित आख्या प्रेषित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शिक्षा को सुरक्षा, समानता, स्वाभिमान और आत्मसम्मान से जोड़ने की पहल: मोनिका रानी

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यालयों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर के साथ-साथ विद्यार्थियों के आत्मसम्मान व स्वाभिमान के विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि Self-Esteem आधारित शिक्षक प्रशिक्षण से विद्यालयों में संवेदनशील, सकारात्मक और समावेशी शैक्षिक वातावरण सुदृढ़ होगा, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।

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