फार्म फाइनेंस और वर्किंग कैपिटल से जुड़ी पांच सबसे बड़ी प्रगतियाँ

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उमेश अरोड़ा

किसानों के लिए समय पर मिलने वाला पैसा उतना ही जरूरी है जितनी बारिश। इसी से वे बीज और खाद खरीद पाते हैं, मजदूरी दे पाते हैं और अपने पशुधन का पालन कर पाते हैं। पहले किसानों के लिए कामकाज चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल जुटाना मुश्किल था, इसलिए वे अक्सर साहूकारों या अनौपचारिक उधार देने वालों पर निर्भर रहते थे। अब बैंकिंग सेक्टर ने लचीले लोन मॉडल तैयार किए हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों तक आसानी से लोन पहुँच रहा है। यहाँ फार्म फाइनेंस से जुड़ी पांच प्रमुख सेवाओं के बारे में बताया गया है।

अपनी सुविधा अनुसार भुगतान करने की योजना

सामान्य लोन की तरह हर महीने तय किस्तें भरने की जरूरत नहीं होती। कृषि लोन की व्यवस्था इस तरह बनाई जाती है कि किसान अपनी फसल के चक्र के अनुसार पैसा चुका सके। किसान फसल की कटाई के बाद लोन चुका सकते हैं, जिससे कमाई के कमजोर महीनों में उन पर दबाव नहीं पड़ता। यह तरीका किसानों में तनाव कम करता है, कर्ज न चुकाने के मामलों को घटाता है और उन्हें अधिक आत्मविश्वास के साथ भविष्य की योजना बनाने में मदद करता है। खेती के लिए कर्ज की माँग लगातार बढ़ रही है, जो दर्शाता है कि किसानों को समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद कितनी जरूरी है।

ज़रूरत के हिसाब से लोन और समझदारी पूर्वक उधार देना

अब सैटेलाइट इमेज, मौसम के आंकड़ों और किसानों द्वारा किए गए पिछले भुगतान जैसे आधुनिक साधनों की मदद से बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा हर फसल, किसान और क्षेत्र के अनुसार लोन की योजना बनाई जा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो में जारी सूचना के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) इस प्रणाली का मुख्य आधार बना हुआ है। 31 दिसंबर 2024 तक इसके 7.72 करोड़ सक्रिय खाते और ₹10.05 लाख करोड़ के लोन जारी किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी पहुँच के साथ, यह जरुरत के हिसाब से लोन की सुविधा, किसानों को समय पर, उपयोगी और उनकी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने में मदद कर रही है।

डिजिटल रूप से लोन की पूरी प्रक्रिया

अब किसानों को लोन लेने के लिए हफ्तों तक कागजी कार्रवाई और यात्रा करने की जरूरत नहीं होती। कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने आधार के माध्यम से ई-केवाईसी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पेश किए हैं, जिससे लोन जल्दी और पारदर्शी तरीके से मिलता है। किसान स्मार्टफोन से आवेदन कर सकता है, जल्दी पैसा प्राप्त कर सकता है और डिजिटल रूप से चुका सकता है। फसल उगाने वाले किसानों के लिए इसका मतलब है समय पर बीज और खाद खरीद पाना, जबकि डेयरी किसानों के लिए इसका मतलब है जानवरों का चारा खरीदने के लिए जल्दी उधार लेना और दूध के भुगतान से चुकाना। कुल मिलाकर, डिजिटल प्रक्रियाओं ने किसानों के लिए लोन की सुविधा को आसान बना दिया है और ग्रामीण स्तर पर वित्तीय प्रबंधन को सरल बनाया है।

बीमा के ज़रिए नुकसान की भरपाई

कृषि में सूखा, बाढ़ और कीटों जैसी प्राकृतिक परेशानियों का हमेशा खतरा रहता है। बीमा के जरिये इन खतरों से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई होती है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो में जारी सूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाय), जो 2016 में शुरू हुई थी, ने 78 करोड़ आवेदन के आधार पर ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक के दावे निपटाए हैं। यह बीमा सुरक्षा मुश्किल समय में किसानों की आमदनी बचाती है और उन्हें भरोसे के साथ दोबारा लोन लेने में मदद करती है। वहीं, इससे बैंक या लोन देने वालों का खतरा भी कम होता है और वे किसानों को ज़्यादा आर्थिक मदद दे पाते हैं।

खेती से जुड़े खर्च और जरूरी सुविधाएँ

अब बैंक या वित्तीय संस्थान सीधे किसानों की फसल या दूध की बिक्री से लोन चुकता करवा रहे हैं, यानी भुगतान सीधे उनकी आमदनी से होता है। वहीं, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट में निवेश को बढ़ावा दे रहा है। ये सुविधाएँ किसानों को अपनी उपज एक जगह सुरक्षित रूप से रखने, नुकसान कम करने और बेहतर दाम में बेचने में मदद करती हैं। डेयरी क्षेत्र में स्थिर खरीदारी किसानों के लिए भरोसेमंद आय सुनिश्चित करती है, जिससे वे अपने लोन का भुगतान आसानी से कर पाते हैं। कुल मिलाकर, वैल्यू चेन फाइनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट मिलकर मजबूत और टिकाऊ कैश फ्लो बनाते हैं।

आगे की दिशा

ये प्रगतियाँ सिर्फ लोन देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों में सहनशीलता, विविधता और आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में बदलाव को दर्शाती हैं। नाबार्ड के चेयरमैन, शाजी के. वी. के अनुसार (टाइम्स ऑफ़ इंडिया, 15 जुलाई 2025), नाबार्ड अनुमान लगा रहा है कि वित्त वर्ष 26 तक कृषि क्रेडिट की मांग ₹32 लाख करोड़ पार कर जाएगी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास ग्रामीण स्तर पर लोन प्रदान करने में अपनी भूमिका बढ़ाने का बड़ा अवसर है। यदि वे वित्तीय प्रगति को सरकारी समर्थन के साथ मिलाएँ, तो वे ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करने में मुख्य साझेदार के रूप में खुद को स्थापित कर सकते हैं।

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