- लाल किला, संसद समेत सिलसिलेवार बम धमाका झेल चुकी है राजधानी
- लाल किले के पास हुए धमाके में फिदायीन हमले के साजिश की आशंका
देश की राजधानी से नया लुक संवाददाता विनय प्रताप सिंह की रिपोर्ट…
नई दिल्ली। भारत की राजधानी। देश चलाने वाले इसी शहर में निवास करते हैं। यहीं से रक्षा, गृह समेत सभी मंत्रालय संचालित होते हैं। लेकिन यह शहर बारूदों के ढेर पर बसा हुआ है। पिछले 25 बरसों में भारत के इस हृदय स्थल पर15 बार आतंकी हमले हुए। आतंकवादियों ने देश के संसद को भी नहीं छोड़ा और लगातार दहशत फैलाते रहे। इन सभी धमाकों में अब तक 50 से अधिक दिल्ली के लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग इन हमलों में घायल हुए हैं।
ये भी पढ़े
ये भी पढ़े
दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में इतना जोर का धमाका हुआ कि 12 लोगों को चीथड़े और कार के परखच्चे उड़ गए। खबरों के मुताबिक इस हमले में करीब 20 लोग गम्भीर रूप से घायल हुए हैं, वहीं 20 से अधिक लोगों को छिटपुट चोटें आई हैं और उनके दिल दहशत में हैं। बताते चलें कि सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में बसे हरियाणा के फरीदाबाद में करीब 360 किलो विस्फोटक सामग्री मिली।
ये भी पढ़े
उसी दिन दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में शुमार पुरानी दिल्ली के लाल किले इलाके में एक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि लाल किला के करीब स्थित लाल मंदिर में कार का एक पार्ट आकर गिरा। मंदिर के शीशे टूट गए और आसपास की कई दुकानों के दरवाजें व खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं। धमाके के बाद आस-पास की दुकानों में आग लगने की सूचना भी मिली। चांदनी चौक के भगीरथ पैलेस इलाके तक कंपन महसूस किया गया। वहीं, कई बसों और अन्य वाहनों में भी आग लगने की खबर है। मेट्रो, रेलवे स्टेशन सहित तमाम सरकारी संस्थानों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह विस्फोट एक I20 कार में हुआ था, जिसमें विस्फोट के समय तीन लोग मौजूद थे।
ये भी पढ़े
जांच एजेंसियों को पता चला है कार तीन घंटे तक पार्किंग में खड़ी रहने के बाद भीड़ बढ़ने पर शाम को निकाली गई। सिर्फ एक ही सवार था, जिससे फिदायीन हमले की आशंका जताई जा रही है। खबरों के मुताबिक कार पुलवामा के अतीक की आईडी पर उमर मोहम्मद ने ली थी। कार तीन घंटे तक पार्किंग में खड़ी रहने के बाद भीड़ बढ़ने पर शाम को निकाली गई। दिल्ली में ब्लास्ट के बाद प्रशासन ने लाल किला की मुख्य सड़क को पूरी तरह बंद कर रखा दिया है, इसके साथ ही घटना स्थल के चारों तरफ 700-800 मीटर की दूरी पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया हैं। इस हमले में तीन आतंकियों की अब तक गिरफ्तारी हुई है, उनके नाम मुजम्मिल, आदिल और उमर बताए जा रहे हैं। इसके साथ फिर एक बार बहस शुरू हो गई कि आखिर भारत में रहते हुए भी किसके इशारे पर इसी कौम के लोग क्यों दहशत फैलाना चाहते हैं? क्या इनका कनेक्शन देश के बाहर के लोगों से हैं या फिर ये देश में हिंदुओं से इतनी नफरत करते हैं कि ये उन्हें मारने के लिए खुद को मानव बम बना लेते हैं? इनके दिलों में इतनी नफरत कौन भरता है? कौन है जो इनके दिमाग को खुद मरकर भी मारने की थ्योरी को सेट करता है? देश में छुपे ऐसे लोगों की पहचान भी जरूरी है।
कब-कब दहली दिल्ली…
21 सदी का पहला साल खत्म हो रहा था। तभी दिसंबर 2000 में दिल्ली में एक आतंकवादी समूह ने हमला कर दिया। तब भी निशाना लाल किला परिसर ही था। लाल किले में हुई गोलीबारी में दो लोग मारे गए थे। एक साल बाद दिसंबर 2001 में संसद भवन पर हमला हुआ, जिसमें नौ सुरक्षाकर्मी और कर्मचारियों की जानें गईं। इसके बाद वर्ष 2005 में राजधानी के पहाड़गंज, सरोजिनी नगर और गोविंदपुरी में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए, जिनमें 71 लोग मारे गए और 200 से ज़्यादा घायल हुए। इस घटना के ठीक तीन साल बाद साल 2008 में राजधानी के हृदय स्थल कनॉट प्लेस, करोल बाग़ और ग्रेटर कैलाश में फिर एक एक साथ पांच विस्फोट हुए, जिनमें 20 से ज़्यादा लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। उसके बाद सितंबर 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर-5 पर हुआ था। इस बम विस्फोट में 15 लोग मारे गए और 79 घायल हुए। साल 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के आने के बाद दिल्ली में इस तरह की घटनाएं नहीं हुई थीं, लेकिन साल 2025 के 11वें महीने में हुआ ये फिदायीन हमला दिल्ली को दहशत में डालने के लिए काफी है।
ये भी पढ़े
खुल रही है दिल्ली पुलिस के वसूली की परतें
नोएडा, हरियाणा या किसी भी बार्डर से प्रवेश करने वाले लोगों से दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी मुस्तैदी से पेश आते हैं। वो गाड़ियों के पेपर की जांच करते हैं। प्रदूषण देखते हैं, डीएल चेक करते हैं और किसी के पेपरों में कमी आ गई तो नीचे हाथों से पैसे लेकर उन्हें जाने देते हैं। सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में घुसने वाले आतंकियों ने दिल्ली पुलिस की यह कमजोरी पकड़ ली होगी और उसी का सहारा लेकर वो अंदर घुस गए होंगे।
