- नगर निगम विभाग को शायद और बड़े हादसों का इंतजार
- ठाकुरगंज, कुकरैल के बाद अब हैदर कैनाल नाला आया सुर्खियों में
- कई घंटों के रेस्क्यू के बाद नहीं मिला सात वर्षीय मासूम वीर
- सिलसिलेवार मिल रही चुनौती के बाद भी नहीं चेत रहा संबंधित विभाग
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हैदर कैनाल नाला, बेहता नाला, कुकरैल, ठाकुरगंज क्षेत्र बने नाले, गोमतीनगर, विभूतिखंड, चिनहट, पुराने पुलिस मुख्यालय के पास बने नाले के अलावा कई जगह करीब चालीस-पचास फीट गहरे नालों पर हर दिन मौत नाचती है। किसी नालों पर ढक्कन तो कई ऐसे नाले हैं वह अर्से से खुले हुए हैं, नतीजतन हर साल किसी न किसी को नील ले रहा है। इतने हादसे होने के बाद भी नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। खास बात यह है कि इन्हें याद तो आती है, लेकिन बड़े हादसे के बाद। बीती जुलाई माह में ठाकुरगंज में खुले नाले में गिरकर पेंटर सुरेश लोधी की जान चली गई थी। इसके बाद भी जारी नगर निगम की लापरवाही से शहर में कई जगह खुले नाले हादसों का सबब बन रहे हैं।
गुरुवार को हुसैनगंज क्षेत्र स्थित रामलीला मैदान के पास रहने वाले बाराबंकी जिले के रूदौली निवासी नन्हा यहां झोपड़ी बनाकर रहते हैं। वहीं से हैदर कैनाल नाला गुजर रहा है। बुधवार शाम उनका मासूम बेटा अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था कि नाले पैर फिसलने के बाद वह तेज बहाव नाले में समा गया। यह तो बानगी भर है इससे पहले भी कई नालों में गिरकर कईयों लोगों की जानें जा चुकी हैं।
12-14 चली तलाश, फिर भी नहीं लगा सुराग
हुसैनगंज क्षेत्र के रामलीला मैदान के पास बने हैदर कैनाल नाले में सात वर्षीय मासूम वीर बह गया। उसकी तलाश में एसडीआरएफ के जवानों व स्थानीय गोताखोरों ने नाले में बुधवार शाम से लेकर गुरुवार सुबह तक ढूंढते रहे, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं लगा। अब पुलिस गुरुवार को पुराने पुलिस मुख्यालय के पास बने बड़े नाले के प्रमुख छोर पर जाल लगाकर गोताखोरों की मदद उसे तलाश करवा रही है। इस बीच तमाम लोगों की भीड़ जमा रही। भीड़ में कुछ लोगों की जुबान पर इस बात की चर्चा होने लगी कि क्या राजधानी लखनऊ का यही नगर निगम दस्ता है, जिसकी नींद हादसे के बाद टूटती है। वहीं घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
