- विश्व अस्थमा दिवस 2026: हर मरीज तक Inhaler पहुंचाना सबसे बड़ी जरूरत
लखनऊ। अस्थमा को भगाना है तो सही इनहेलर अपनाना है, इसी संदेश के साथ विशेषज्ञों ने विश्व अस्थमा दिवस पर जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। इस वर्ष की थीम “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए एंटी इन्फ्लैमेट्री इनहेलर्स (Anti-Inflammatory Inhalers) की उपलब्धता, अभी भी एक अति आवश्यकता” रखी गई थी। यह थीम इलाज तक समान पहुंच की चुनौती को उजागर करती है।
प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश के अनुसार, अस्थमा आज भी दुनिया और भारत दोनों के लिए बड़ी स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। भारत में 3.4 करोड़ से अधिक मरीज अस्थमा से जूझ रहे हैं, जो वैश्विक बोझ का बड़ा हिस्सा है। खराब वायु गुणवत्ता, जागरूकता की कमी और सही इलाज तक सीमित पहुंच इस स्थिति को और गंभीर बना रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनिया भर में करीब 26.2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। हर साल लगभग 4.55 लाख मौतें इस बीमारी से होती हैं। चिंताजनक बात यह है कि अस्थमा से होने वाली वैश्विक मौतों का 46 फीसदी भारत में होता है।
इनहेलर तक पहुंच अभी भी चुनौतीः आवश्यक दवाओं की सूची में इनहेलर शामिल हैं, फिर भी भारत में इनका उपयोग कम है। विशेषज्ञों ने कहा कि इन चुनौतियों को दूर किए बिना अस्थमा से मौतों में कमी संभव नहीं है। लखनऊ स्थित King George’s Medical University (KGMU) का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग अस्थमा और एलर्जी मरीजों के लिए उन्नत जांच और उपचार उपलब्ध करा रहा है।
क्या हैं अस्थमा के लक्षण?
सांस लेते समय घरघराहट, सांस फूलना, रात या सुबह खांसी, छाती में जकड़न या दर्द। यह सभी लक्षण एलर्जी, संक्रमण, वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, तनाव और शारीरिक परिश्रम अस्थमा के प्रमुख ट्रिगर माने जाते हैं। डॉ. वेद प्रकाश ने स्पष्ट किया कि अस्थमा लाइलाज नहीं है, बल्कि सही उपचार और जीवनशैली से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो कंट्रोलर दवाएं (इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स), रिलीवर दवाएं (तुरंत राहत के लिए), ट्रिगर से बचाव, नियमित जांच और फॉलो-अप। इन उपायों से मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। यहां पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, स्किन प्रिक टेस्ट, बायोलॉजिक थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। इसके लिए प्रदूषण और धूल से बचें, धूम्रपान और धुएं से दूरी रखें। एलर्जी कारकों से बचें। समय पर टीकाकरण कराएं और डॉक्टर की सलाह से दवाएं नियमित लें। डॉ. वेद कहते हैं कि सस्ती दवाओं की उपलब्धता, जागरूकता अभियान, डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग और प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता देने से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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