मोदी कोई शख्स नहीं, वह तो एक खूंटी है

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मोदी :  आपमें से कुछ को लग सकता है कि मैं मोदी को अपमानित कर रहा हूँ। न ! ऐसा नहीं है ! आज ट्विटर पर एक वीडियो सुना, सोचा आपसे भी साझा कर लूँ। एक लेख की शक्ल में। तो पढ़िए –

हमारे प्राईम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी, इलेक्शन दर इलेक्शन जीतते जा रहे हैं। भक्त इसे उनका करिश्मा मानते हैं और हेटर समझ ही नहीं पा रहे कि इसका कारण क्या है। तो दोष मढ़ देते हैं,कि हिन्दू मुस्लिम विभाजन करके जीतते हैं।

मेरा यह मानना है कि नरेंद्र मोदी नामका कोई शख्स है ही नहीं। वह तो केवल एक मुखौटा हैं, जिसके माध्यम से देश के अंतर्मन में छुपा हुआ क्रोध सामने आया है। कुछ बहुत गहरे जख्म हैं, कुछ गहरे घाव हैं, कुछ धोखे हैं, जिन्हें व्यक्त करने का कोई मौका नहीं मिला था देश को, एक मौका मिला, जिसका नाम है नरेंद्र मोदी। सवाल यह है कि यह गंगा जमुनी तहजीब, यह कौमी एकता, यह गुलदस्ता कितना सच है ?हिन्दू मुस्लिम में दरार है या नहीं, अविश्वास है या नहीं, या सब कुछ ठीक है, या यह बातें तो मोदी ने फैलाई हैं। आइये इस सवाल का जबाब ढूंढें।

क्या आपको मालूम है कि सन 1800 से इस देश में हिन्दू मुस्लिम दंगे हो रहे हैं। 1926 में पूरे देश में दंगे हुए थे। 1946 में डायरेक्ट एक्शन के नाम पर हुए दंगे तो बहुचर्चित हैं ही। तो ये गंगा जमुनी तहजीब कहाँ है ?
आईये एक और तरह से देखते हैं। आजादी का आंदोलन चला, गांधीजी हमारे नेता थे, हम सब उनको बहुत प्यार करते हैं, आदर करते हैं, कोई शक ही नहीं। 1932 में अम्बेडकर से गांधी जी का मतभेद हुआ। तो गांधी जी ने अम्बेडकर के घर के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया। अम्बेडकर को झुकना पड़ा। पर उस समय अम्बेडकर ने बहुत प्यारी बात कही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते जेएमएम के मुखिया हेमंत सोरेन

उन्होंने कहा कि बात तो मेरी ही सही है, किन्तु गांधी जी की देश को आवश्यकता है, मैं उनका जीवन खतरे में नहीं डाल सकता, इसलिए अपनी मांग वापस लेता हूँ। 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में सुभाषचंद्र बोस जीत गए थे, सीतारामैया हार गए थे। लेकिन गांधी जी ने कहा – नहीं बोस नहीं बनेंगे, अगर बने तो मैं कांग्रेस छोड़ दूंगा। और विवश सुभाष बाबू ने त्यागपत्र दे दिया। यहाँ भी गांधी जी की जिद सामने आई। अंग्रेजों के खिलाफ गांधी जी ने भूख हड़तालें की और अंग्रेज झुके भी। लेकिन सवाल यह है कि जब जिन्ना ने देश विभाजन की बात की तब गांधी जी ने उसके घर के सामने आमरण अनशन क्यों नहीं किया ? इस सवाल का जबाब कोई नहीं देगा।

खैर 1947 में देश का विभाजन हुआ। पंद्रह बीस लाख लाशें देखी गईं, जो हिटलर नहीं कर पाया, वह मंजर सामने आया। एक देश करोड़ लोग विस्थापित हुए और वषों तक उन्होंने नारकीय जीवन झेला। पूरे मानव इतिहास में इससे भयावह त्रासदी दूसरी नहीं। सैकड़ों महिलाओं को नग्नावस्था में सडकों पर दौड़ाया गया। कितनी दर्दनाक स्थिति। लेकिन हुई क्यों ? केवल इसलिए कि मुस्लिम ने कहा – हम आपके साथ नहीं रहेंगे। और इसके बाद भी वही बकबास चल रही है – गंगा जमुनी तहजीब। आप सच का सामना कब तक नहीं करोगे ?

उस दौर में जो विस्थापित हुए, जिन्होंने नारकीय कष्ट झेले, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानियां ज़िंदा हैं। याद रखिये कहानियां अपने हीरो या विलेन से अधिक उम्र रखती हैं। जीसस चले गए, राम चले गए, कृष्ण चले गए, लेकिन उनकी कहानियां जिन्दा हैं। कहानियां देश की अंतश्चेतना का अंग बन जाती हैं। हिन्दू मुस्लिम अलगाव का कारण भी यही है।

आजादी के बाद बड़ी अजीब अजीब सी चीजें होने लगीं देश में। शरीया की बातें होने लगीं, चार शादियां कर सकते हैं, शाह बानो आती थी तो पूरा संसद शीर्षासन करने लगता था। उल्टा लटक जाता था सुप्रीम कोर्ट को दबाने के लिए। तो कभी यह क्यों नहीं कहा गया कि हम शरीयत पूरी तरह से लागू करेंगे। हिन्दू चोर जेल में जाएगा, मुसलमान चोर के हाथ काट दिए जाएंगे। यह कभी किसी प्लेटफॉर्म पर कहा नहीं गया, लेकिन लोगों के दिल में था। इस सवाल को दबाया कैसे गया ?

कांग्रेस के हाथ में ताकत आई। पार्टीशन की विभीषिका के आरोप से बचना था, हम फ़ैल हो गए, इस अपराधबोध से बचना था। तो सारी पाठ्यपुस्तकें अपने हिसाब से लिखीं, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, शिक्षाविद अपने हिसाब से रखे, अपने लोगों को ही मंच दिए, पब्लीसिटी दी और नई पीढ़ी को समझाया गया – दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल। जवाहरलाल नेहरू गुलाब का फूल लगाते थे और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहते थे। आजादी के बस दो ही हीरो। रोजा इफ्तारों में गुलछर्रे उड़ाती कांग्रेस बनती गई मछलीमार पार्टी। उन्होंने मुस्लिम वोटों की फिशिंग स्टार्ट कर दी। यह रणनीति धीरे धीरे लालू, मुलायम, ममता सबको समझ में आती गई और सब ने भी यही फिशिंग स्टार्ट कर दी।

आईये एक बड़ी रोचक कल्पना करते हैं। मान लीजिये कि आजादी के बाद सारे अंग्रेज देश छोड़कर नहीं जाते, बहुत से यहीं रहा जाते, जैसा साऊथ अफ्रीका में किया, तो क्या होता ? यह वोट बैंक की राजनीति उनके वोट पाने के लिए यह कहने में भी परहेज नहीं करती कि अंग्रेजों काराज्य तो बहुत अच्छा था।

एक सवाल और भी है। आज अगर भारत पाकिस्तान और बांगला देश की मुस्लिम आबादी को जोड़ें तो लगभग पचास करोड़ होती है। इतने तो किसी मुस्लिम देश में भी नहीं हैं। कहाँ से आये ये इतने मुस्लिम। दलाल टाइप के जो लोग हैं, उन्होंने इस सवाल को लेकर एक नया नेरेटिव स्टार्ट किया। ये हिन्दू ही थे, प्यार से कन्वर्ट हो गए, सूफियों ने दरवेशों ने बड़े प्यार से इन्हें मुस्लिम बना लिया। एक उदाहरण देखिये।

जैसे हमारा देश है, ऐसे ही एक देश था पर्सिया, जहाँ पारसी रहते थे। कलाओं में ट्रेड में सबमें बहुत आगे था पर्सिया। मुस्लिमों का आक्रमण हुआ और पच्चीस तीस साल में ही उस देश में एक भी पारसी जिन्दा नहीं बचा। लूट ह्त्या बलात्कार की वही कहानी। जो जान बचाकर भाग गए वे ही बचे, कुछ पारसी भारत में भी आये और भारत तो शरण देने में आगे रहता ही है। पर्सिया के सारे पारसी बड़े प्यार से कन्वर्ट हो गए। और देश का नाम हो गया ईरान। ऐसा प्यार दुनिया ने कई जगह देखा है, कई बार देखा है।

एशिया में अफ्रीका में ऐसा प्यार पच्चीस तीस देशों ने बर्दास्त किया है। और वे सबके सब पूरी तरह इस्लामी बन गए। लेटेस्ट कश्मीर, जब वहां से चार लाख हिन्दू भगाये गए, तो बड़े प्यार से भागे वहां से। और पूरा कश्मीर इस्लामिक हो गया। आप रहिये स्वप्नलोक में, वे अपने आप में पूरी तरह स्पष्ट हैं। जैसा कि बगदादी कहता है – अगर हमारे साम्राज्य में कोई गैर मुस्लिम रहेगा तो उसे डिम्मी बनकर रहना होगा।

आप या तो बहुत भोले हैं, या इतने मूर्ख कि देखते ही नहीं कि दुनिया में क्या हो रहा है। अगर आप इन तथ्यों को नकारते हैं, तो आप या तो झूठे हैं, या दलाल हैं। एक सवाल का जबाब दीजिये। अगर आप कोई वाहन चलाते हुए किसी मुस्लिम बहुल इलाके से निकलते हैं, तो क्या अतिरिक्त सावधान नहीं हो जाते। आप जानते हैं, कहीं गलती से भी कोई टक्कर हो गई, तो खातिरदारी पूरी झकास होगी।

इस देश की पार्लियामेंट पर हमला हुआ। और हमले में शामिल अफजल गुरू के सम्मान में समर्थन में हजारों हजार लोग खड़े हो गए। कुछ साल पहले मुम्बई के आजाद मैदान में एक रैली हुई, रोहिंग्याओं के समर्थन में। आपका क्या लेना देना रोहिंग्याओं से ? और रैली के अंत में क्या हुआ ?जो शहीद स्मारक था वहां, उसे जूते मार मार कर तोड़ दिया गया। इतनी नफ़रत आपके मन में इस देश के लिए ?और कोई कुछ कहता ही नहीं।

चलते चलते एक छोटा सा सुझाव – जब भी आपको कोई सेक्यूलर मिले और आपको ज्ञान दे गंगा जमुनी तहजीब का सब धर्म एक समान हैं, सब धर्म ग्रन्थ एक समान हैं – तो उसको एक कागज़ थमाईये और कहिये – इस पर लिखो गीता कुरआन बाईबिल सब एक समान हैं, राम कृष्ण ईसा पैगम्बर मोहम्मद सब एक जैसे हैं, न कोई छोटा, न कोई बड़ा – और अब जाईये दो चार मुस्लिम से साईन करा कर लाईये। सारी सेक्यूलरी निकल जाएगी।

हिन्दू यह सब देखते रहे, समझते रहे, मन ही मन कुढ़ते रहे, लेकिन उनके पास अपने गुस्से को प्रगट करने का कोई माध्यम नहीं था। नरेंद्र मोदी सामने आये, तो हिन्दुओं ने अपने गुस्से को उस खूंटी पर टांगना शुरू कर दिया।

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