सुपरनोवा कितनी ‘सुपर’? गगनचुंबी इमारत में बढ़ते विवादों ने सुरक्षा पर खड़े किए सवाल

सुपरनोवा कितनी सुपर? गगनचुंबी इमारत के साथ बढ़ते विवादों ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल

Noida : के सेक्टर-94 में यमुना नदी और ओखला बर्ड सैंक्चुरी के करीब बनी सुपरनोवा दूर से ही अपनी ऊंचाई और आधुनिक डिजाइन की वजह से आकर्षित करती है। कांच से सजी ऊंची इमारतें और शानदार आर्किटेक्चर नोएडा की आधुनिक पहचान को दिखाते हैं। लेकिन बीते कुछ समय से सुपरनोवा की चर्चा इसकी खूबसूरती से ज्यादा सुरक्षा और विवादों को लेकर हो रही है।

हाल में 28 वर्षीय संभव जैन की स्पायरा टावर की 43वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए। बताया गया कि संभव Airbnb के जरिए एक फ्लैट में एक दिन के लिए ठहरा था। हालांकि उसकी निजी और आर्थिक परेशानियों की बात सामने आई है, इसलिए घटना को सीधे सोसायटी की व्यवस्था से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिर भी इस हादसे ने हाईराइज इमारतों में शॉर्ट-टर्म स्टे और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।

तीन साल में चार मौतों से बढ़ी चिंता

सुपरनोवा से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता यह है कि पिछले तीन वर्षों में यहां ऊंचाई से गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े परिसर में ऊंची मंजिलों तक पहुंच, विजिटर एंट्री और आपात स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी है।

यह मामला केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सुपरनोवा में शॉर्ट-टर्म रेंटल को लेकर भी लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाल ही में एक बी एंड बी संचालक को गेट पर रोके जाने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि उसने कार से बूम बैरियर तोड़ दिया। घटना के बाद पुलिस कार्रवाई हुई और मामला सुर्खियों में आ गया।

मिक्स्ड-यूज मॉडल बना चुनौती

सुपरनोवा की खासियत इसका मिक्स्ड-यूज मॉडल है। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक ही परिसर में चलती हैं। नोवा ईस्ट और नोवा वेस्ट में सैकड़ों परिवार स्थायी रूप से रहते हैं, जबकि स्पायरा टावर में कई यूनिट व्यावसायिक गतिविधियों और शॉर्ट-टर्म स्टे के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती रही है।

यही स्थिति सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बनती है। स्थायी निवासियों के मुकाबले शॉर्ट-टर्म मेहमान लगातार बदलते रहते हैं। ऐसे में गेट, लिफ्ट, पार्किंग और कॉमन एरिया में आने-जाने वालों की निगरानी ज्यादा कठिन हो जाती है।

प्रशासन भी पहले दे चुका है नोटिस

शॉर्ट-टर्म रेंटल का विवाद नया नहीं है। अक्टूबर 2025 में नोएडा जिला प्रशासन ने कथित तौर पर बिना जरूरी पंजीकरण बी एंड बी या होम-स्टे जैसी गतिविधियां चलाने वाले 100 से अधिक फ्लैट मालिकों को नोटिस जारी किए थे। इससे साफ है कि समस्या लंबे समय से प्रशासन और सोसायटी दोनों के सामने रही है।

अब सुपरनोवा में किरायेदारों और शॉर्ट-टर्म स्टे को लेकर नियम सख्त किए जा रहे हैं। पहचान दस्तावेज, पुलिस वैरिफिकेशन और किरायेदारी से जुड़ी जानकारी लेने पर जोर दिया गया है। साथ ही फ्लैटों को पीजी, हॉस्टल, गेस्ट हाउस या नियमों के खिलाफ शॉर्ट-टर्म रेंटल के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक की बात कही गई है।

सिर्फ Airbnb पर रोक काफी नहीं

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Airbnb या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने से समस्या खत्म हो जाएगी? शायद नहीं। असली जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें फ्लैट मालिक, ऑपरेटर, सोसायटी और प्रशासन की जिम्मेदारी स्पष्ट हो।

हर शॉर्ट-स्टे गेस्ट का सत्यापन, अनुमति प्राप्त गतिविधियों का पंजीकरण, फायर सेफ्टी की जांच और गेट से लेकर कॉमन एरिया तक प्रभावी निगरानी जरूरी है। साथ ही नियम परिवार, बैचलर या पेशे के आधार पर नहीं, बल्कि पहचान, सत्यापन और व्यवहार के आधार पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

सुपरनोवा की ऊंचाई उसकी पहचान जरूर है, लेकिन इतनी ऊंची इमारत में सुरक्षा का स्तर भी उतना ही मजबूत होना चाहिए। असली चुनौती यही है कि आधुनिकता और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ निवासियों की सुरक्षा का संतुलन कैसे कायम किया जाए।

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