Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी व्रत का पारण कब करें? जानें शुभ समय, विधि और नियम

New Delhi

New Delhi: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि और प्रायश्चित से जुड़ा माना जाता है। विशेष रूप से महिलाएं इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास रखकर सप्तऋषियों का पूजन करती हैं। व्रत रखने के साथ ही उसका सही समय पर पारण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर आपने भी ऋषि पंचमी 2026 का व्रत रखा है, तो आइए जानते हैं कि व्रत का पारण कब करना उचित रहेगा और पारण के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

16 सितंबर को किया जा सकता है पारण

इस वर्ष ऋषि पंचमी का पर्व 15 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। पंचमी तिथि की शुरुआत 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे हुई। वहीं पंचमी तिथि का समापन 16 सितंबर 2026 को सुबह 8:58 बजे होगा। जो व्रती अगले दिन पारण करने की परंपरा का पालन करते हैं, वे 16 सितंबर को पंचमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत खोल सकते हैं। पारण से पहले स्नान और पूजा करने के साथ सप्तऋषियों को श्रद्धापूर्वक नमन करना शुभ माना जाता है।

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पारण से पहले करें दान

धार्मिक मान्यताओं में व्रत के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए पारण करने से पहले अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, फल, वस्त्र या दक्षिणा का दान किया जा सकता है। यदि किसी कारण से उसी समय दान करना संभव न हो तो दान के लिए सामग्री अलग रखी जा सकती है और सुविधानुसार बाद में दान किया जा सकता है।

कैसे करें ऋषि पंचमी व्रत का पारण?

पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर में पूजा स्थल की सफाई करके सप्तऋषियों की पूजा करें। पूजा में फल, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। ऋषि पंचमी के व्रत में खान-पान को लेकर भी विशेष मान्यता है। परंपरा के अनुसार व्रती हल से उगाए गए सामान्य अनाज जैसे गेहूं और चावल का सेवन नहीं करते। पारण के लिए समा के चावल, पसई के चावल या तिन्ही के चावल जैसे विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है

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पारण के भोजन को सात्विक तरीके से तैयार करें। सबसे पहले भोजन का भोग सप्तऋषियों को लगाएं। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन ग्रहण करें। व्रत खोलते समय पहले जल पीना और फिर निर्धारित सात्विक भोजन या फलाहार लेना उचित माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

ऋषि पंचमी व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ अलग हो सकते हैं। इसलिए पारण करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं का भी ध्यान रखें।

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