Colombo: भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान स्पष्ट भरोसा दिलाया कि श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह आश्वासन ऐसे समय में सामने आया है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी को लेकर भारत लगातार सतर्क रहा है।
राजनाथ सिंह इन दिनों श्रीलंका की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। कोलंबो में हुई मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। श्रीलंका की ओर से दिया गया यह भरोसा खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि चीन की मौजूदगी हंबनटोटा बंदरगाह में काफी बढ़ चुकी है।
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हंबनटोटा पोर्ट को लेकर भारत की चिंता
हंबनटोटा बंदरगाह श्रीलंका में चीन की रणनीतिक और व्यावसायिक मौजूदगी का प्रमुख केंद्र है। श्रीलंका ने चीन से लिए गए कर्ज को चुकाने में मुश्किलों के बाद वर्ष 2017 में बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था। इसके बाद से यहां चीन की गतिविधियां बढ़ी हैं।
भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी ऐसी गतिविधि को लेकर चिंतित रहा है, जिससे उसकी समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में श्रीलंका का यह कहना कि उसकी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा, दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत करने वाला संदेश माना जा रहा है।
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रक्षा सहयोग को लेकर तीन समझौते
राजनाथ सिंह और श्रीलंका के नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। इनमें श्रीलंकाई वायुसेना के इस्तेमाल में आने वाली भारत निर्मित L70 वायु रक्षा तोपों के आधुनिकीकरण से जुड़ा समझौता भी शामिल है।
भारत ने वर्ष 2000 से 2006 के बीच श्रीलंका की वायुसेना को 24 L70 वायु रक्षा तोपें उपलब्ध कराई थीं। इनमें से 18 तोपों का रखरखाव भारत की ओर से हाल के वर्षों में निशुल्क किया गया है। अब बाकी छह तोपों के रखरखाव में भी भारत सहायता देगा। इसके अलावा दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर और नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर भी समझौता हुआ। भारतीय सेना द्वारा श्रीलंका में बनाए गए तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया।
आपदा के बाद भारत की मदद की सराहना
बैठक के दौरान श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ और पुनर्वास प्रयासों के लिए आभार जताया। दोनों देशों ने विकास, समुद्री सुरक्षा और जनता के हित से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। राजनाथ सिंह ने भी कहा कि भारत और श्रीलंका करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार हैं। दोनों देश क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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