
लगातार गिरावट से बाजार बेहाल
Share Market Closed: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों में सतर्कता बनी रही और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 फीसदी टूटकर 76,909.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 फीसदी गिरकर 24,078.30 पर आ गया। बाजार में व्यापक स्तर पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान करीब 1,725 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,386 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। करीब 179 शेयर ऐसे रहे, जिनमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ रुपया
शेयर बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को आठ पैसे कमजोर होकर 95.76 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को रुपया 95.68 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। इस तरह घरेलू मुद्रा में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर रुपये का असर खास तौर पर आयात लागत और विदेशी निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
IT सेक्टर ने संभाला मोर्चा
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो IT इंडेक्स को छोड़कर ज्यादातर सेक्टरों में गिरावट रही। डिफेंस इंडेक्स करीब 2 फीसदी और एनर्जी इंडेक्स लगभग 1.4 फीसदी नीचे रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप इंडेक्स करीब 0.3 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे संकेत मिलता है कि बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।
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इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
निफ्टी में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, मैक्स हेल्थकेयर, कोल इंडिया, जियो फाइनेंशियल और बजाज फाइनेंस प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर अपोलो हॉस्पिटल्स, हीरो मोटोकॉर्प, अदाणी पोर्ट्स, आयशर मोटर्स और मारुति सुजुकी में खरीदारी देखने को मिली और ये शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार पर क्यों बना दबाव?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। अमेरिकी FOMC की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले बाजार में सावधानी का माहौल रहा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, महंगाई को लेकर अमेरिकी फेड की चिंता और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने भी बाजार की धारणा पर दबाव बनाया। हालांकि कमजोर रुपये से IT कंपनियों को कुछ राहत मिली, क्योंकि डॉलर में कमाई करने वाली IT कंपनियों के लिए कमजोर घरेलू मुद्रा आमतौर पर सकारात्मक मानी जाती है।
आगे बाजार की दिशा किन चीजों पर निर्भर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, अमेरिकी फेड के संकेतों, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। लगातार गिरावट के बाद बाजार में निचले स्तर पर खरीदारी लौटती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, बुधवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा। सेंसेक्स 77 हजार के स्तर से नीचे और निफ्टी 24,100 के आसपास बंद हुआ। ऐसे में अगले सत्र में बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों की अहम भूमिका रह सकती है।
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