
Lata-Asha Singing Style : भारतीय संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर और आशा भोसले का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है। दोनों ने अपनी अलग आवाज, गायकी के अंदाज और शानदार अभिव्यक्ति से कई दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। अब मशहूर प्लेबैक सिंगर शान ने दोनों दिग्गज गायिकाओं की गायकी के उस खास पहलू पर बात की है, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। शान ने यह दिलचस्प खुलासा ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में बातचीत के दौरान किया। इस सीरीज में संगीत की दुनिया से जुड़े दिग्गज अपने करियर, अनुभवों और उन अनसुनी कहानियों को साझा करते हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत को नई दिशा दी।
लता जी की गायकी में सांस की आवाज तक नहीं आती थी
लता मंगेशकर की गायकी के बारे में बात करते हुए शान ने उनकी सांस पर जबरदस्त पकड़ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लता जी जब गाती थीं तो उनकी सांस की आवाज लगभग सुनाई नहीं देती थी।शान के मुताबिक, यह उनकी गायकी की असाधारण कला थी कि वह किस तरह सांस लेती थीं और उसे आवाज में आने से रोकती थीं। उस दौर में रिकॉर्डिंग तकनीक आज की तरह एडवांस नहीं थी। सिंगर्स को गाते समय ही अपनी आवाज, सांस और एक्सप्रेशन पर पूरा नियंत्रण रखना पड़ता था। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय स्टूडियो में गाते हुए चेहरे के हाव-भाव को लेकर भी काफी सावधानी रखनी पड़ती थी। अगर कोई गायक अजीब एक्सप्रेशन देता, तो आसपास मौजूद दूसरे म्यूजिशियन का ध्यान भटक सकता था और माहौल हल्का हो सकता था। ऐसे में लता जी की अपनी एक बेहद सटीक तकनीक थी, जिसने उनकी गायकी को खास बनाया।
आशा भोसले सांस का करती थीं अलग अंदाज में इस्तेमाल
वहीं आशा भोसले की गायकी को लेकर शान ने बिल्कुल अलग खूबी बताई। उनके मुताबिक आशा जी अपनी सांस का इस्तेमाल बेहद खूबसूरती और समझदारी के साथ करती थीं। खासकर ऐसे गानों में, जिनमें रोमांस या सेंशुअसनेस का भाव होता था, आशा जी की सुनाई देने वाली सांस गीत की भावनाओं को और गहरा बना देती थी। उनकी यही खासियत कई गानों को एक अलग अंदाज देती थी। शान ने बताया कि उस दौर के सिंगर्स को खुद यह समझना पड़ता था कि गाने में कहां सांस लेनी है और कहां नहीं। इसके लिए लगातार अभ्यास, समझ और मेहनत की जरूरत होती थी।
आज की तकनीक से कितना बदला संगीत?
शान ने पुराने दौर और आज की रिकॉर्डिंग तकनीक के बीच अंतर की ओर भी इशारा किया। आज संगीतकारों और सिंगर्स के पास कई ऐसे तकनीकी संसाधन मौजूद हैं, जिनकी मदद से रिकॉर्डिंग के बाद आवाज को एडिट और क्लीन किया जा सकता है। लेकिन पुराने दौर में गायकों को रिकॉर्डिंग के दौरान ही अपनी गायकी की बारीकियों पर पूरा नियंत्रण रखना पड़ता था। यही वजह है कि उस दौर के कई महान गायकों की तकनीक और आवाज आज भी संगीत की दुनिया के लिए मिसाल बनी हुई है।
‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में शान की खास बातचीत
कोमल नाहटा की ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ संगीत से जुड़ी कई दिलचस्प और अनसुनी बातों को सामने लाने की कोशिश कर रही है। शान के साथ हुई बातचीत में भी भारतीय संगीत के सुनहरे दौर और महान गायकों की तकनीक से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं पर चर्चा हुई।
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