
Gold Price Today: सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। एक अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने ने दोबारा ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर पार कर लिया। वहीं चांदी की कीमत भी बढ़त के साथ कारोबार करती नजर आई। सितंबर में सोने की कीमतों में तेज गिरावट के बाद अक्टूबर की शुरुआत में आई यह तेजी निवेशकों और खरीदारों के लिए अहम मानी जा रही है।
कमजोर महंगाई आंकड़ों से सोने को मिला सहारा
अमेरिका से आए महंगाई से जुड़े आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कमजोर पड़ने से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला।
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आमतौर पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव का असर सोने की कीमतों पर देखने को मिलता है। ऐसे में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर आने वाले दिनों में भी बाजार की नजर बनी रह सकती है।
सितंबर में 6.5 फीसदी तक टूटा था भाव
सितंबर के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 6.5 फीसदी नीचे आई। यह जून के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट में से एक रही। इस दौरान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर के अंतिम दिनों में अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेज उछाल देखने को मिला। वहीं डॉलर इंडेक्स भी कई महीनों के ऊंचे स्तर पर पहुंचा। मजबूत डॉलर को आमतौर पर सोने के लिए दबाव बनाने वाला कारक माना जाता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है।
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अक्टूबर में बढ़ सकती है घरेलू मांग
भारत में अक्टूबर और नवंबर का समय सोने की मांग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। इसके अलावा शादी-ब्याह के सीजन के कारण भी सोने की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है। त्योहारी सीजन में आभूषणों की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने को समर्थन मिल सकता है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी कीमतों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी रह सकती है।
अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर नजर
आने वाले समय में सोने की दिशा तय करने में अमेरिका के रोजगार और महंगाई से जुड़े आंकड़ों की भूमिका अहम हो सकती है। इन आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार को आगे के संकेत मिल सकते हैं। अगर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है और त्योहारी सीजन में भारत की भौतिक मांग बढ़ती है, तो सोने की कीमतों को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने के भाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।
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