
Murder case: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के बरला कस्बे में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड सुरेश कुमार की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। सजा की जानकारी मिलते ही आरोपी महिला रोने लगी, जबकि उसके बच्चों ने उससे दूरी बना ली। मामले में मृतक के बड़े बेटे की गवाही को अभियोजन के लिए अहम माना गया।
यह फैसला एडीजे द्वितीय तोष कुमार शर्मा की अदालत ने सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुरेश कुमार बरला कस्बे के मोहल्ला कोठी का रहने वाला था और नोएडा में निजी सुरक्षा कर्मी के रूप में काम करता था। पुलिस के मुताबिक, सुरेश की पत्नी बीना के गांव के ही मनोज के साथ कथित तौर पर संबंध थे। इन संबंधों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होता था।
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घर के बाहर बुलाकर गोली मारने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 10 जुलाई 2025 की सुबह सुरेश दिल्ली जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसकी पत्नी ने उसे रोक लिया और किसी बहाने से घर के बाहर बैठा दिया। सुरेश वहां मोबाइल फोन चला रहा था। इसी दौरान मनोज मौके पर पहुंचा और कथित तौर पर तमंचे से सुरेश के सीने में गोली मार दी।
गोली लगने से सुरेश गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। घटना के समय सुरेश का भाई विजय सिंह पास की एक परचून की दुकान पर मौजूद था। गोली चलने की आवाज सुनकर वह मौके की ओर दौड़ा। अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान आरोपी ने दूसरा फायर भी किया, जो विजय सिंह के कान के पास से गुजरते हुए दीवार में जा लगा। इस घटना में विजय के चेहरे पर छर्रे लगने से वह घायल हुआ था।
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हत्या के बाद थाने पहुंचा आरोपी
मामले में पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी मनोज खुद थाने पहुंच गया और पुलिस के सामने हत्या करने की बात कही। इसके बाद मृतक के भाई विजय सिंह की शिकायत पर बीना और मनोज के खिलाफ हत्या और जानलेवा हमले समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत में 5 फरवरी को आरोप तय किए गए। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
बेटे की गवाही बनी अहम कड़ी
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान मृतक के बड़े बेटे की गवाही महत्वपूर्ण रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पत्नी बीना और मनोज को हत्या का दोषी माना और दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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