
British Navy drone : ब्रिटेन की रॉयल नेवी के निगरानी ड्रोन को लेकर सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। एक जांच के दौरान K3 स्काउट ड्रोन में इस्तेमाल किए गए कुछ थर्ड-पार्टी कैमरों का चीन से जुड़ा कनेक्शन सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कैमरों से चीन स्थित सर्वर या IP एड्रेस की ओर लगातार ‘हार्टबीट सिग्नल’ भेजे जा रहे थे। इस खुलासे के बाद ब्रिटेन के रक्षा प्रतिष्ठान में साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ड्रोन में लगे कैमरों ने भेजा सिग्नल
K3 स्काउट ड्रोन ब्रिटिश डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर क्रैकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं। इनका इस्तेमाल रॉयल मरीन की निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियों में किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान ड्रोन में लगे कुछ कैमरों के नेटवर्क व्यवहार को संदिग्ध पाया गया।
बताया गया है कि कैमरे नियमित अंतराल पर ‘हार्टबीट कम्युनिकेशन’ भेज रहे थे। तकनीकी भाषा में हार्टबीट सिग्नल किसी डिवाइस की कनेक्टिविटी या सक्रिय स्थिति की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इस तरह के सिग्नल का मिलना अपने आप में संवेदनशील डेटा चोरी होने का प्रमाण नहीं माना जाता।
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ड्रोन बंद होने के बाद भी एक्टिव रहने का दावा
मामले में सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि कुछ कैमरों के बारे में जांच में दावा किया गया कि ड्रोन बंद होने के बाद भी वे सक्रिय बने रहे। इसके बाद ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने एहतियाती कदम उठाते हुए इन ड्रोन की इंटरनेट कनेक्टिविटी को हटा दिया। इन ड्रोन का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों के आसपास किए जाने के कारण सुरक्षा विशेषज्ञों ने संभावित डेटा एक्सपोजर को लेकर चिंता जताई है।
क्या संवेदनशील जानकारी लीक हुई?
मामले में सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि कुछ कैमरों के बारे में जांच में दावा किया गया कि ड्रोन बंद होने के बाद भी वे सक्रिय बने रहे। इसके बाद ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने एहतियाती कदम उठाते हुए इन ड्रोन की इंटरनेट कनेक्टिविटी को हटा दिया। इन ड्रोन का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों के आसपास किए जाने के कारण सुरक्षा विशेषज्ञों ने संभावित डेटा एक्सपोजर को लेकर चिंता जताई है।

क्या संवेदनशील जानकारी लीक हुई?
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूटीन साइबर सिक्योरिटी जांच के दौरान इस समस्या का पता चला। मंत्रालय ने कहा है कि अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि रक्षा मंत्रालय का संवेदनशील डेटा चोरी हुआ या किसी बाहरी सिस्टम में ट्रांसफर किया गया। यानी फिलहाल मामला संभावित सुरक्षा जोखिम और सप्लाई चेन की जांच से जुड़ा है। इसे सीधे तौर पर ‘चीनी जासूसी’ साबित करने वाला प्रमाण नहीं माना जा सकता।
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निर्माता ने भी दिया स्पष्टीकरण
ड्रोन निर्माता क्रैकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। कंपनी के मुताबिक ड्रोन में इस्तेमाल किए गए थर्ड-पार्टी कैमरे सुरक्षा मानकों के अनुरूप थे। हालांकि, कैमरों के कुछ हिस्से ब्रिटेन के बाहर निर्मित होने की बात सामने आई है। कंपनी का कहना है कि विस्तृत ऑडिट के बाद संभावित सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।
ब्रिटेन-चीन संबंधों पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने ब्रिटेन की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में विदेशी तकनीक और कलपुर्जों के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है। ब्रिटेन पहले भी संवेदनशील तकनीकी ढांचे में चीनी कंपनियों की भूमिका को लेकर सुरक्षा चिंताएं जाहिर करता रहा है। अब K3 स्काउटड्रोन से जुड़े मामले के बाद रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले हर इलेक्ट्रॉनिक पार्ट की जांच और सप्लाई चेन की सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
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