
Jio Technology : भारत के टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने के बाद रिलायंस जियो अब अपनी पहचान सिर्फ एक कनेक्टिविटी कंपनी तक सीमित नहीं रखना चाहता। कंपनी अब डीप-टेक और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड, 6G, एंटरप्राइज सॉल्यूशन और स्वदेशी डिजिटल टेक्नोलॉजी इसके अगले चरण के प्रमुख क्षेत्र हैं। जियो की रणनीति का एक अहम हिस्सा भारत में विकसित तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के बाद दूसरे देशों के बाजारों तक पहुंचाना है। कंपनी के पास 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों का बड़ा नेटवर्क है, जो उसकी तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में परखने और बड़े स्तर पर लागू करने का आधार देता है।
कनेक्टिविटी से टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट तक बढ़ रहा जियो
जियो की शुरुआती पहचान सस्ते मोबाइल डेटा, तेज नेटवर्क विस्तार और बड़े ग्राहक आधार के साथ बनी। अब कंपनी नेटवर्क के लिए बाहरी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंजीनियरिंग क्षमता विकसित कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर जियो को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी से आगे ले जाने की दिशा पर जोर दिया। कंपनी कनेक्टिविटी के साथ डिजिटल प्रोडक्ट, एंटरप्राइज सॉल्यूशन और AI आधारित तकनीक विकसित करने पर काम कर रही है।
जियो ने तैयार किया अपना 5G टेक्नोलॉजी स्टैक
जियो ने अपना 5G Core और OSS/BSS सिस्टम विकसित किया है। इसके साथ Core, Radio और Operations Software को जोड़कर एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक यह स्टैक Standalone 5G पर आधारित है और बड़े स्तर पर इसकी टेस्टिंग की जा चुकी है। जियो ने अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2023 के बीच देशभर में 5G कवरेज का विस्तार किया। मार्च 2026 तक कंपनी के 5G यूजर्स की संख्या 26.8 करोड़ से ज्यादा बताई गई थी। जियो के नेटवर्क पर कुल वायरलेस ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी भी करीब 55 फीसदी तक पहुंच गई थी।
6,817 पेटेंट दाखिल, 1,009 को मिल चुकी मंजूरी
जियो के टेक्नोलॉजी विस्तार का एक बड़ा संकेत उसका पेटेंट पोर्टफोलियो है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी सहायक कंपनियों ने कुल 6,817 पेटेंट दाखिल किए थे।
इनमें से 2,393 पेटेंट भारत में और 4,424 विदेशी अधिकार क्षेत्रों में दाखिल किए गए। कुल पेटेंट में से 1,009 को वैश्विक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी थी। इनमें 538 भारत में और 471 विदेशी बाजारों में स्वीकृत हुए।
इन पेटेंट में 4G, 5G, 6G, AI और क्लाउड जैसी तकनीकों से जुड़े आविष्कार शामिल हैं।
WIPO की ग्लोबल रैंकिंग में जियो की एंट्री
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की 2025 PCT आवेदनों पर आधारित रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स पहली बार ग्लोबल टॉप-20 में शामिल हुआ। उपलब्ध WIPO आंकड़ों के मुताबिक जियो 19वें स्थान पर रहा और 2025 में उसके 1,058 प्रकाशित PCT आवेदन थे।
WIPO के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में कुल 2,75,900 PCT आवेदन दाखिल हुए और डिजिटल कम्युनिकेशन सबसे प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में रहा।
भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित हो रही तकनीक
जियो का फोकस ऐसी तकनीक विकसित करने पर भी है, जो भारत जैसे बड़े और विविध बाजार में कम लागत के साथ बड़े पैमाने पर काम कर सके। होम ब्रॉडबैंड के लिए कंपनी ने Unlicensed Band Radio (UBR) तकनीक विकसित की है। इसका इस्तेमाल उन इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है, जहां पारंपरिक फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल या महंगा है। कंपनी ने मैक्रो बेस स्टेशन, आउटडोर और इनडोर स्मॉल सेल, मिलीमीटर-वेव, 5G-Wi-Fi, 1 Tbps User-Plane Function और छोटे आकार के निजी 5G नेटवर्क समाधान ‘5G-in-a-box’ जैसी तकनीकों पर भी काम किया है।
52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहक जियो की बड़ी ताकत
रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक जियो का कुल ग्राहक आधार 52.4 करोड़ से ज्यादा था। इतने बड़े लाइव नेटवर्क पर अपनी तकनीक को लागू करने और टेस्ट करने की क्षमता कंपनी के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी आधार बनती है। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो नेटवर्क पर करीब 241 एक्साबाइट डेटा ट्रैफिक दर्ज किया गया। इससे कंपनी को बड़े पैमाने पर नेटवर्क टेक्नोलॉजी को वास्तविक परिस्थितियों में परखने का अनुभव मिलता है।
AI, क्लाउड और एज कंप्यूटिंग पर भी फोकस
जियो का टेक्नोलॉजी विस्तार अब मोबाइल नेटवर्क से आगे बढ़कर AI, क्लाउड, एज कंप्यूटिंग और प्राइवेट 5G तक पहुंच रहा है। कंपनी स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क स्लाइसिंग, निजी 5G नेटवर्क, एज कंप्यूटिंग, क्लाउड प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट जैसी तकनीकों के जरिए एंटरप्राइज बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। रिलायंस की रणनीति में AI को कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने पर भी जोर है। कंपनी भारत की बड़ी आबादी और अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AI तकनीक विकसित करने और समान जरूरत वाले दूसरे बाजारों में उसके इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रही है।
6G में भी बढ़ रही हिस्सेदारी
जियो का फोकस अगली पीढ़ी की मोबाइल टेक्नोलॉजी यानी 6G पर भी है। कंपनी के पेटेंट पोर्टफोलियो में 6G से जुड़ी तकनीक शामिल है और वह भविष्य के वैश्विक तकनीकी मानकों को विकसित करने की प्रक्रिया में भाग ले रही है। इसका उद्देश्य केवल भविष्य की तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि उसके विकास, मानकीकरण और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका को मजबूत करना है।
भारत से दुनिया तक पहुंचने की तैयारी
जियो अब मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड और अन्य नेटवर्क टेक्नोलॉजी को वैश्विक बाजारों तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा रही तकनीक को दूसरे देशों के टेलीकॉम ऑपरेटरों और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए पेश करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में कम लागत वाली और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली कनेक्टिविटी तकनीक की जरूरत जियो के लिए संभावित अवसर पैदा कर सकती है।
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