
New Delhi: चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। खास तौर पर मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि आयोग में अलग-अलग राय और सुझाव देना सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
क्या है Form 6 और क्यों उठा विवाद?
Form 6 नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वैधानिक फॉर्म है। हालिया विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान इसके ऑनलाइन संस्करण में जोड़े गए एक नए घोषणा-पत्र से जुड़ा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नए प्रावधान में आवेदक से पिछली SIR के दौरान मतदाता सूची में उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी/नाना-नानी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई। आवेदक को दिए गए विकल्पों में से एक चुनना था। रिपोर्ट के अनुसार, इस हिस्से को अनिवार्य नहीं बताया गया था, लेकिन जवाब दिए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
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दो चुनाव आयुक्तों ने क्यों जताई आपत्ति?
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में Form 6 में प्रस्तावित बदलाव को लेकर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि Form 6 Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की जरूरत होगी।
बताया गया है कि बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इसी मुद्दे पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों की ओर से बदलाव को लेकर प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।
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SIR से कैसे जुड़ा है मामला?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इसी प्रक्रिया के दौरान Form 6 में नए सवालों को शामिल किए जाने पर विवाद सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, Form 6 के अलावा चुनावी डेटा और डिजिटल सिस्टम के संचालन को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए थे।
आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने रिपोर्टों में लगाए गए एकतरफा निर्णय के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और आयुक्तों की ओर से सुझाव, सवाल और टिप्पणियां आना संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन होने और उसके कदमों को कानून के अनुरूप बताया है।
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