
E20 को लेकर नए सवाल
E20 Petrol Controversy : देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद इसे लेकर सरकार और आम उपभोक्ताओं के बीच बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी लगातार E20 पेट्रोल को पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा और वाहन प्रदर्शन के लिए लाभकारी बता रही हैं। वहीं, विशेषज्ञों और कुछ सरकारी दस्तावेजों के आधार पर कई सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या E20 से जुड़े सभी दावे पूरी तरह वास्तविक हैं या उन्हें सीमित संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि E20 की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने से वाहनों का प्रदर्शन बेहतर होगा। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों को समझने के लिए पूरे संदर्भ को जानना जरूरी है।
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ऑक्टेन नंबर को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। प्रचार में 108.5 का आंकड़ा सामने रखा गया है, जबकि यह शुद्ध इथेनॉल (E100) का रिसर्च ऑक्टेन नंबर है। वहीं, पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित E20 ईंधन का ऑक्टेन स्तर लगभग 95 RON माना जाता है। दूसरी ओर, वर्तमान में भारत में मिलने वाला सामान्य पेट्रोल भी लगभग 91 RON का होता है। ऐसे में वास्तविक तुलना 91 और 95 के बीच होनी चाहिए, न कि 84.4 और 108.5 के बीच।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक ऑक्टेन वाला ईंधन केवल उन इंजनों
के लिए उपयोगी होता है, जिन्हें उसी तकनीक के अनुरूप डिजाइन किया गया हो। सामान्य वाहनों में इससे न तो माइलेज में बड़ा बदलाव आता है और न ही इंजन की शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
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सरकार ने यह भी दावा किया है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से अब तक लाखों मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है और करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बची है। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ये अनुमानित आंकड़े हैं, जिनमें इथेनॉल उत्पादन, परिवहन, भंडारण और सरकारी प्रोत्साहन जैसी लागतों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, भारत अभी भी अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए E20 आयात निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों के प्रभाव से पूरी तरह बचा नहीं सकता।
पुराने वाहनों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित कई वाहनों के रबर पार्ट्स, फ्यूल पाइप और गास्केट पर E20 का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि आवश्यक परीक्षण किए जा चुके हैं और अधिकांश वाहनों के लिए यह सुरक्षित है, लेकिन पुराने वाहन मालिकों में अभी भी संशय बना हुआ है।
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One thought on “E20 पेट्रोल पर बढ़ते सवाल: सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना है अंतर?”
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