
NEET Paper Leak : NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को बार-बार सामने आने वाली खामियों और गलतियों के चक्र से बाहर निकालना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल सुझावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक मजबूत और सुरक्षित सिस्टम तैयार करना जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि वह परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया पर नजर बनाए रखेगी, ताकि भविष्य में छात्रों के हितों से कोई समझौता न हो।
केंद्र सरकार ने सुधारों की जानकारी दी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र ने भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित और परीक्षा की विश्वसनीयता सरकार की प्राथमिकता है।
वायुसेना की मदद को बताया अस्थायी व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली गई थी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता। परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए एक ऐसी मजबूत व्यवस्था की जरूरत है, जो लंबे समय तक प्रभावी रहे और किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की संभावना को कम करे।
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हाइब्रिड परीक्षा मॉडल पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से हाइब्रिड परीक्षा मॉडल को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने पूछा है कि इस मॉडल को लागू करने में क्या संभावनाएं और चुनौतियां हैं। हाइब्रिड मॉडल के तहत परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले प्रश्नपत्र डिजिटल रूप से सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक भेजने का प्रस्ताव है। इसके बाद परीक्षा केंद्र पर ही प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्रों के परिवहन और स्टोरेज के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है।
CBT मोड पर भी विचार करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि क्या भविष्य में नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) प्रणाली के जरिए कराया जा सकता है। अदालत का मानना है कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी ढांचे और प्रशासनिक चुनौतियों का आकलन करना भी जरूरी होगा।
NTA की साइबर सुरक्षा मजबूत करने पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA को साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। अदालत ने परीक्षा एजेंसी के ढांचे, विशेषज्ञों की भूमिका और सुधारों की कार्ययोजना पर भी जानकारी मांगी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और NTA को निर्देश दिया है कि वे परीक्षा सुरक्षा, हाइब्रिड मॉडल, CBT सिस्टम और अन्य सुधारों को लेकर 3 अगस्त तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से साफ है कि आने वाले समय में परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, ताकि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और भरोसा कायम किया जा सके।
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