
Assam Floods : असम में लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आए तेज जल प्रवाह ने कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। शिवसागर और चराईदेव जिलों में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। कई गांव पानी से घिर गए हैं और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं। नजीरा क्षेत्र के हुलंग काटोनी गांव से सामने आया एक वीडियो बाढ़ की भयावह स्थिति को उजागर कर रहा है। वीडियो में एक स्कूली छात्र अपनी आपबीती बताते हुए नजर आ रहा है। बच्चे ने बताया कि उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है और परिवार के लोग मजबूरी में पत्ते खाने तक को विवश हैं। उसने बताया कि उसने अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पूरी रात एक पेड़ पर बैठकर गुजारी।
पेड़ पर गुजारी पूरी रात, खाने-पीने का संकट
बताया जा रहा है कि नजीरा कस्बे से करीब चार किलोमीटर दूर हुलंग काटोनी गांव में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया। पानी इतना बढ़ गया कि कई घर पूरी तरह जलमग्न हो गए। मजबूरी में कुछ परिवारों ने पेड़ों और छतों पर शरण ली। वायरल वीडियो में बच्चा हाथ में एक पत्ता दिखाते हुए अपनी परेशानी बताता है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने बारिश के बीच पेड़ पर बैठकर रात गुजारी। कई लोग बीमार पड़ चुके हैं और उनके पास न तो पर्याप्त भोजन है, न ही पीने का साफ पानी उपलब्ध है।
सेना और राहत दलों की तैनाती की मांग
नजीरा के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और जिला प्रशासन से अपील की कि प्रभावित परिवारों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए। उन्होंने हुलंग काटोनी गांव में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना, NDRF और SDRF की टीमों को तत्काल भेजने की मांग की। उनका कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई इलाकों में लोगों की जान खतरे में है। सैकिया ने कहा कि रविवार रात से ही कई परिवार भोजन, पानी और सुरक्षित आश्रय के बिना संघर्ष कर रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग भी शामिल हैं। उन्होंने प्रशासन से युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाने की अपील की है।
यह भी पढ़ें
सोनम वांगचुक मामले में बड़ा अपडेट, केंद्र बोला- मेदांता शिफ्टिंग का विरोध नहीं करेंगे
हजारों परिवार बाढ़ में फंसे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात इसलिए भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि कई जगह मोबाइल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे लोगों को प्रशासन और राहत एजेंसियों तक अपनी स्थिति पहुंचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नजीरा क्षेत्र के सुंदर पुखुरी कलिता गांव, सुंदरपुखुरी हुलंग गांव और निर्मोलिया गांव सहित कई इलाकों में स्थिति गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां बड़ी संख्या में परिवार पानी से घिरे हुए हैं और कई लोग अभी भी अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। तेज बहाव के कारण सड़क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।
राहत और बचाव अभियान पर नजर
असम में बाढ़ की स्थिति लगातार प्रशासन की निगरानी में है। प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही बचाव दल पहुंचेंगे और फंसे हुए परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। असम की यह बाढ़ एक बार फिर दिखाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं। फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: सोनम वांगचुक का अब मेदांता अस्पताल में होगा इलाज
Delhi Fire : लोधी कॉलोनी में भीषण आग का कहर, एक परिवार की तीन सदस्यों की मौत
रणजीत सागर बांध में बढ़ा जलस्तर, बिजली उत्पादन और सिंचाई को मिली राहत

