
पाकिस्तान पर बरसे S-400 और ब्रह्मोस
Air Marshal Jitendra Mishra: पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में भारत की ओर से चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर देश की सैन्य क्षमता और नई युद्ध रणनीति का बड़ा उदाहरण माना गया। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया। इस पूरे अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के हाथों में थी। अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें राम मंदिर का नया CEO नियुक्त किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर में क्या थी जितेंद्र मिश्र की भूमिका?
ऑपरेशन सिंदूर के समय एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। उन्होंने 1 जनवरी 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी। पश्चिमी वायु कमान भारत के सबसे संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में से एक की निगरानी करती है। इसके जिम्मे दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और सियाचिन तक के महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र आते हैं।
पाकिस्तान से लगी सीमा के कारण ऑपरेशन सिंदूर में इस कमान की भूमिका बेहद अहम थी। मिश्र के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने लक्ष्य चयन, हथियारों के इस्तेमाल और अभियान के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन के दौरान आतंकी ठिकानों के साथ-साथ पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को भी निशाना बनाया गया। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया।
कब बने पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को पश्चिमी वायु कमान का पदभार संभाला था। इससे पहले वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (ऑपरेशंस) के पद पर तैनात थे। दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल हुए मिश्र के पास 3,000 से ज्यादा घंटे की उड़ान का अनुभव है।
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वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रह चुके हैं। कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने मिराज-2000 से जुड़े अभियानों में लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल की तैयारियों में योगदान दिया था। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की जान गई। भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ढांचे को जिम्मेदार माना। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
6-7 मई की रात से शुरू हुई इस कार्रवाई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारतीय हमलों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई। मुरीदके, बहावलपुर और मुजफ्फराबाद समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की गई।
पाकिस्तान के सैन्य ठिकाने भी बने निशाना
शुरुआती कार्रवाई के बाद जब पाकिस्तान की ओर से जवाबी सैन्य कार्रवाई की गई, तो भारत ने अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। पाकिस्तान के एयरबेस और एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय हमलों के प्रमुख लक्ष्य बने।
भारतीय सेना ने स्टैंड-ऑफ हथियारों का इस्तेमाल करते हुए कई हमले भारतीय सीमा के भीतर से किए। इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और लड़ाकू विमानों के जोखिम को कम रखना था। पूरे अभियान में खुफिया जानकारी के आधार पर लक्ष्यों का चयन किया गया, ताकि सैन्य उद्देश्यों को हासिल करते हुए नागरिक नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
S-400 ने संभाला एयर डिफेंस का मोर्चा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका भी चर्चा में रही। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से जब भी विमान भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ते थे, तो S-400 सिस्टम उन्हें रोकने में अहम भूमिका निभाता था। मिश्र ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि एक बार उन्होंने खुद S-400 ऑपरेटर को लक्ष्य पर कार्रवाई का आदेश दिया था।
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उनके मुताबिक करीब 314 किलोमीटर दूर लक्ष्य को नष्ट किया गया। इसे दुनिया के सबसे लंबी दूरी के सतह से हवा में मार करने वाले हमलों में से एक बताया गया। भारत की एयर डिफेंस व्यवस्था ने पाकिस्तान की ओर से आने वाले विमानों और ड्रोन के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार किया।
ब्रह्मोस, राफेल और SCALP ने बढ़ाई भारत की ताकत
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। इनमें प्रमुख रूप से—
- S-400 एयर डिफेंस सिस्टम
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- राफेल लड़ाकू विमान
- SCALP-EG क्रूज मिसाइल
- HAMMER गाइडेड बम
- Su-30MKI, मिग-29 और मिराज-2000
- आकाश एयर डिफेंस सिस्टम
- HAROP और अन्य लोइटिंग म्यूनिशन्स
- विभिन्न ड्रोन और सटीक मार करने वाले हथियार शामिल रहे।
पाकिस्तान की एयर डिफेंस को कमजोर करना बना रणनीति का अहम हिस्सा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रणनीति केवल आतंकी ठिकानों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रही। पाकिस्तान के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और निगरानी क्षमता को भी निशाना बनाया गया। इससे पाकिस्तान की हवाई निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता पर असर पड़ा। भारतीय पक्ष ने स्टैंड-ऑफ हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एकीकृत एयर कमांड सिस्टम के जरिए अभियान को अंजाम दिया। भारतीय रणनीति में सटीकता, नियंत्रित जवाब और सीमित सैन्य जोखिम पर विशेष जोर रहा।
सीमा पार किए बिना दूर से किए गए हमले
ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह थी कि भारत ने बड़े पैमाने पर स्टैंड-ऑफ हथियारों के जरिए अपनी सीमा से ही लक्ष्यों को निशाना बनाया। इस रणनीति ने आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी के सटीक हथियारों और एयर डिफेंस की बढ़ती भूमिका को सामने रखा। भारत ने सैन्य कार्रवाई को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया और जरूरत के मुताबिक जवाब की तीव्रता बढ़ाई।
जितेंद्र मिश्र का सैन्य करियर रहा बेहद लंबा
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा। फाइटर पायलट के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और कमांड जिम्मेदारियां संभालीं। कारगिल युद्ध से लेकर आधुनिक एयर कॉम्बैट सिस्टम और ऑपरेशनल प्लानिंग तक उनका अनुभव व्यापक रहा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की कमान संभालना उनके करियर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल रहा। अब भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद राम मंदिर के नए CEO के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी चर्चा में है। सैन्य क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले जितेंद्र मिश्र से अब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
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