
Sugar prices: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी के बढ़ते दाम और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब भारत को चीनी उत्पादन में आत्मनिर्भर बताया जाता है, तो फिर विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। खड़गे ने एथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
कई शहरों में ₹70 किलो तक पहुंची चीनी
देश के कुछ हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम लगभग 40 फीसदी यानी करीब 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं। बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर ड्यूटी-फ्री आयात करने की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम करना है।
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गुड़, चावल और मक्के के आटे के दाम भी बढ़े
महंगाई का असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों के दौरान गुड़ की कीमतों में करीब 24 फीसदी, चावल में 16 फीसदी और मक्के के आटे में लगभग 11 फीसदी तक वृद्धि दर्ज की गई है। चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे एक प्रमुख वजह मिलों के पास उपलब्ध शुरुआती स्टॉक में कमी को माना जा रहा है। पिछले सीजन में नई पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का स्टॉक था, जबकि इस बार यह मात्रा घटकर लगभग 32 लाख टन रह गई है।
करीब एक दशक बाद चीनी आयात की जरूरत
भारत दुनिया में चीनी उत्पादन के मामले में ब्राजील के बाद दूसरे स्थान पर है। देश ने 2021-22 में करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का रिकॉर्ड निर्यात किया था। इसके बाद निर्यात में कमी देखने को मिली। घरेलू बाजार में कमी होने पर सरकार दूसरे देशों से कच्ची चीनी मंगाकर उसे घरेलू मिलों में रिफाइन कराने का रास्ता अपनाती है। भारत ने आखिरी बार 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की थी। अब लगभग नौ साल बाद फिर आयात की जरूरत सामने आई है।
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गन्ने की फसल को नुकसान से उत्पादन घटा
2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख टन का था। फसल को रेड रॉट, टॉप बोरर और अधिक बारिश जैसी समस्याओं से नुकसान पहुंचने के कारण उत्पादन अनुमान में कमी आई है। सरकार का कहना है कि सितंबर 2026 के अंत तक देश में करीब 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद रह सकता है। केंद्र के मुताबिक, यह घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
अक्टूबर से बढ़ सकती है बाजार में सप्लाई
सरकार को उम्मीद है कि चीनी मिलों में नए सीजन की पेराई करीब 15 अक्टूबर से शुरू हो सकती है। इससे अक्टूबर के दौरान बाजार में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी पहुंचने की संभावना है। त्योहारी सीजन में कीमतों और उपलब्धता पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने जमाखोरी पर भी निगरानी बढ़ाई है। डीलर्स के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। वहीं, एक सितंबर से बड़े थोक खरीदारों को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी।
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