
प्राऊड पिता हाथ में झोला लिए अब दो थानों के बीच लगा रहा चक्कर
रंजन कुमार सिंह
Jharkhand News : यह एक पिता हैं, सुभाशीष मुखर्जी। धनबाद के रहने वाले एक प्राउड पिता। इनकी एक बिटिया है शताब्दी मुखर्जी। इसी बेटी के ये प्राउड फादर हैं। बिटिया को जन्म से ही काफी फ्रीडम दिया, एकदम मॉडर्न फादर की भाँति। धनबाद के वन ऑफ द बेस्ट स्कूल कार्मेल स्कूल में इसकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हुई। उच्च शिक्षा के लिए बेटी राँची आने की बात कही तो पिता ने सहर्ष अनुमति दी। बिटिया के कैरियर के लिए बिटिया ने जो कुछ भी मांगा पिता ने तुरंत हाज़िर कर दिया। कभी किसी चीज की कमी नहीं। कभी किसी चीज के लिए रोक-टोक नहीं। बेटी ख़ुद जैसा लाइफ जीना चाहती एकदम स्वतंत्र थी। राँची के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज संत जेवियर्स कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में मास्टर डिग्री ली। फिर रांची से ही B.Ed. करी। इसके बाद इसने लीजिंग एनालिस्ट के तौर पे सवा दो साल की जॉब करी। फिर इसने टीचिंग के तरफ अपना करियर मोड़ा।
रांची स्थित चिरंजीवी कॉन्सेप्ट स्कूल में बतौर इंग्लिश टीचर अपना टीचिंग करियर स्टार्ट की। यहां एक साल दो महीने ड्यूटी करने के बाद इसने जॉब स्विच किया। फिर सुप्रसिद्ध जी.डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में अप्रैल 2025 से अपनी सेवाएं दे रही है जो वर्तमान में भी जारी है। शताब्दी स्कूल में पढ़ाती और पास के ही लवली गर्ल्स हॉस्टल में रहती। तकरीबन रोज ही अपने माता-पिता से बात करती। इधर पिता धनबाद में बेटी के करियर को ले के प्राउड फील करते। कहते कि देखो हमने बेटी को पढ़ा-लिखा के कहाँ तक पहुंचा दिया। कई लोग कहते थे कि बेटी के पीछे ज्यादा खर्चा वर्चा मत कीजिये, उम्र हो जाने के बाद ब्याह कर दीजिए लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी। और आज देखो मेरी बिटिया कहाँ पहुँच गई है। जी.डी. गोयनका जैसे ग्रुप में जॉब कर रही है। कितना सौभाग्यशाली और प्राउड फादर हूँ मैं।
ऐसे ही प्राउड और सुखमय जीवन चल रहा था सुभाशीष बाबू का। रोज ही बिटिया से बात करते और अपना काम भी करते। फिर एक दिन अचानक बिटिया का मोबाइल स्विच ऑफ। सोचे कि बैटरी डाउन होगा या आउट ऑफ नेटवर्क होगा तो लगेगा कॉल बाद में। लेकिन बाद में भी कॉल नहीं लगा। दो – तीन दिन तक जब मोबाइल स्विच ऑफ ही रहा तो इन्हें चिंता हुई। ये भागे-भागे रांची आये। होस्टल गए। पूछे तो पता चला कि आपकी बेटी 29 जून से यहां है ही नहीं। लास्ट एंट्री 29 जून की ही है। एक 27 वर्षीय जवान बेटी अचानक से गायब है। मोबाइल कई दिन से स्विच ऑफ है। कहीं कुछ अता पता नहीं। ऐसे में भला कौन पिता का हृदय धक-धक नहीं करेगा ?? दौड़े-दौड़े लोअर बाजार थाने गए और अपनी बेटी के गुमशुदगी का रिपोर्ट लिखवाए।
अपने भी सामर्थ्य से जब गहरी खोजबीन जारी किए तो पता चला कि बिटिया रानी जमशेदपुर के एक मुस्लिम युवक के साथ निक़ाह करके जमशेदपुर चली गई है उसके घर। सुभाशीष बाबू पता-वता मालूमात कर के जमशेदपुर गए बिटिया के यहाँ, साथ में अपने बेटे को भी ले के गए। वहां जब पहुंचे तो बिटिया ने पिता को पहचानने से इनकार कर दिया। जब पिता थे तब थे अब नहीं। अब मेरे शौहर ही सबकुछ है। मुझे अब यहाँ से कोई नहीं ले जा सकता। भला यही होगा कि आप लोग इज्जत से यहां से वापिस चले जाएं।
एक पिता जिन्होंने 27 साल तक जिस बिटिया को पाला हो वो भला ऐसे ही चला जायेगा क्या ? एक झटके में 27 साल का समर्पण खत्म! पिता ने समझाने की कोशिश की तो एज यूज्वल जमात के लोग इकट्ठे हो गए। जमात के लोगों ने पिता और बेटे को मारते-पीटते हुए वहां से बाहर कर दिया। एक प्राउड पिता को लाडली बिटिया की ओर पेबैक का ये पहला किश्त था। इसके बाद पिता-पुत्र जमशेदपुर थाने गए। वहां भी रिपोर्ट लिखवाए। और इधर लाडली बिटिया ने पिता को पेबैक की दूसरी किश्त जारी की। अपना वीडियो फूटेज भेजी जिसमें वह कहती हुई दिखी कि मैंने अपनी मर्ज़ी से निक़ाह किया है। कोई इसमें जोर-जबर्दस्ती नहीं है। मेरे पिता और भाई मुझे तंग न करें। अभी ये पिता हाथ में झोला लिए दो थानों के बीच झूल रहा है। कभी जमशेदपुर तो कभी राँची। झोले में हैं वो तमाम कागज़ात जो बिटिया रानी के उपलब्धियों का पिटारा है। गुहार लगा रहा कि मेरी बिटिया को किसी तरीके से वहाँ से बाहर निकालो। उसे बहला फुसलाकर शादी कर लिया गया है।
अभी ये प्राउड पिता अपनी बेटी के बारे में लोगों के सामने क्या बोलता होगा ? कुछ दिन पहले ही जो पिता छाती चौड़ी कर के अपनी बिटिया रानी के उपलब्धियों का गुणगान करता था, गुणगान करते हुए फुले नहीं समाता था वो पिता अब किस मुंह से अपनी बेटी की बात कहेगा ? दस आदमियों के बीच बैठ कर जो अपनी बेटी की प्रशंसा करता था वो अब अकेले में भी बैठ कर डर रहा है। स्वयं से भी प्रश्न करने में भय खाने लगा है। एक पिता मजबूर है असहाय है। पुलिस के भरोसे बैठा है। लेकिन पुलिस तो कानून से ही चलेगा। बिटिया बालिग है, और वीडियो जारी करके मर्जी से निक़ाह करने की बात कह चुकी है, तो इसमें पुलिस क्या करेगी भला ??
हाँ हिंदू संगठन चाहे तो कुछ मदद कर सकते है इस पिता की।
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One thought on “ बेटी को बेटे की तरह दी आज़ादी, जॉब में आते ही मुस्लिम लड़के के साथ भागी”
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