
Coaching Center चीखों से कांप उठा लखनऊ: सपनों की क्लास बनी मौत का फंदा
18 घरों के बुझ गए चिराग, मौत की तड़प सोचकर काँप रहा रूह

नवाबों का शहर। उत्तर प्रदेश की राजधानी। लखनऊ का अलीगंज। सोमवार को सिर्फ आग की लपटों से नहीं, बल्कि उन मासूम चीखों से दहल उठा जो अपने भविष्य के लिए पढ़ने आए थे। जिस कोचिंग सेंटर में बच्चे अपने सपनों को आकार देने पहुंचे थे, वही इमारत कुछ ही मिनटों में उनकी आखिरी मंजिल बन गई। किसी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था, कोई इंजीनियर बनकर माता-पिता का नाम रोशन करना चाहता था। लेकिन आग की भयावह लपटों ने उन सपनों को राख में बदल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगते ही कोचिंग सेंटर में अफरा-तफरी मच गई। कई छात्र-छात्राएं जान बचाने के लिए छत से कूद गए तो कई बाथरूम में छिपकर मौत से लड़ते रहे। कुछ छात्रों ने अपने परिजनों को फोन कर बताया कि वे अंदर फंस गए हैं और सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद फोन हमेशा के लिए खामोश हो गए। एक भाई की आखिरी आवाज थी, “भैया, मैं अंदर फंस गया हूं… शायद अब बाहर न निकल पाऊं…”। यह सुनकर परिजनों की दुनिया उजड़ गई।
सबसे दर्दनाक खुलासा यह हुआ कि इमारत में आपातकालीन निकास द्वार नहीं था। लोगों का कहना है कि ऑफिस का मुख्य गेट थंब इम्प्रेशन सिस्टम से खुलता था और आग लगने के बाद वह लॉक हो गया। छत पर जाने का रास्ता भी बंद था। अगर निकास का रास्ता होता, तो शायद कई जिंदगियां बच सकती थीं। KGMU पहुंचे शवों के बाहर जो दृश्य था, उसे देखकर पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े। कोई अपने बेटे की पहचान कर रहा था, कोई बेटी के शव से लिपटकर बेहोश हो रहा था। कई परिजन दूसरे राज्यों से लखनऊ पहुंचे, लेकिन जिन बच्चों को लेने आए थे, वे अब ताबूतों में बंद थे।

मृतकों में सागर, नीलेश, आदित्य श्रीवास्तव, अनामिका, सुखमनी, अब्दुल रहमान समेत कई युवा शामिल हैं, जिनकी उम्र 19 से 24 वर्ष के बीच थी। ये सभी अपने परिवारों की उम्मीद थे। यूपी के CM योगी आदित्यनाथ स्वयं घटनास्थल और KGMU पहुंचे। घायलों का हाल जाना, परिजनों से मुलाकात की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। आज लखनऊ का हर घर यही सवाल पूछ रहा है, ‘क्या इन मासूम जिंदगियों की मौत सिर्फ एक हादसा थी या लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था की कीमत?’ लेकिन इन मुआवजों से उन माता-पिता का दर्द कैसे कम होगा, जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने भेजा था और बदले में उनकी अर्थी मिली?
आखिर दोषी कौन?
सोमवार को लखनऊ के 18 मासूम छात्रों की जानें गईं। फोन पर परिजनों को सूचना देने के बाद कई बच्चों ने दम तोड़ा। मौके पर पहुँचे CM YOGI के कोप से बचने के लिए LDA ने अपने दो कर्मी सस्पेंड कर दिए। लेकिन व्यावसायिक टैक्स वसूल रहे नगर निगम के अफसर साफ साफ बच गए। क्या ध्वस्तीकरण के आदेश का पालन कराना केवल AE या JE की जिम्मेदारी होती है। क्या ऊपर बैठे अफसर केवल आदेश पारित करने के लिए बैठे हैं। उनकी कोई जवाबदेही नहीं है या सरकार तय करने में अक्षम है। सवाल उठता है कि वास्तविक दोषी कौन है? LDA, नगर निगम, काम्पलेक्स का मालिक या सरकार। क्या सरकार असल जिम्मेदार पर कार्रवाई कर पाएगी?
“उन बच्चों की चीखें अब भी कानों में गूंज रही हैं…”
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की भयावह तस्वीर एक पड़ोसी महिला की आंखों में आज भी ताजा है। कांपती आवाज में उन्होंने बताया कि आग लगते ही कोचिंग सेंटर के अंदर फंसे बच्चे मदद के लिए चीख रहे थे। कुछ छात्र जान बचाने की आखिरी कोशिश में खिड़कियां तोड़कर नीचे कूद रहे थे। मैंने बच्चों को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर लगातार मदद की गुहार लगाई, लेकिन सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था। आने-जाने के रास्ते पर लगे एसी के आउटर एक-एक कर फट रहे थे। उस समय बच्चे एक-दूसरे से लिपटकर रो रहे थे।
नम आंखे,भर्राये कण्ठ नहीं बोल पाए दिग्गज से दिग्गज नेता
अलीगंज की उस जली हुई इमारत से अब भी धुआं उठ रहा है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा धुआं उन परिवारों के दिलों में उठ रहा है, जिनके सपने, उम्मीदें और भविष्य उस आग में हमेशा के लिए जल गए। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहुँचें। वो कुछ कहना चाह रहे थे, लेकिन गला साथ नहीं दे रहा था। आंखें बार बार पसीज रही थी। जुबां लड़खड़ा रही थी, लेकिन परिजनों को ढाढ़स बंधाया। यूपी BJP के मुखिया पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल ने भी दुख व्यक्त किया। कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी ने भी शौक व्यक किया। सपा मुखिया अखिलेश यादव और BSP सुप्रीमो मायावती ने भी शोक संदेश जारी किया। लेकिन सवाल वही LDA के दो AE, JE सस्पेंड कर देने से उन परिजनों का दर्द कम नहीं होगा, जिन्होंने अपने नौनिहालों को खोया है। हमारे एक साथी ने अपने रुंधे कंठ से कुछ लिखकर हमें भेजा था। उन्हीं की चंद लाईनों से आप समझिए आम आदमी कितना आहत हुआ है।
हे प्रभु… न जाने कितने माता-पिता ने अपने बच्चों को खो दिया है। यह सोचकर ही हृदय व्यथित हो उठता है कि वे माँ-बाप अब अपना शेष जीवन कैसे बिताएंगे। जब भी वे अपने बेटे या बेटी का कमरो को देखेंगे, उनकी चीज़ों को देखेंगे, हर याद उन्हें भीतर तक झकझोर देगी। समय के साथ दुनिया आगे बढ़ जाएगी। लोग अपनी-अपनी ज़िंदगी, कामकाज, खुशियों और समारोहों में व्यस्त हो जाएंगे, और शायद इस घटना को भूल भी जाएं। लेकिन जिन परिवारों ने अपने जिगर के टुकड़े खोए हैं, उनके लिए यह दर्द कभी समाप्त नहीं होगा। उनके जीवन में जो खालीपन आया है, उसे कोई भर नहीं सकता, और इस पीड़ा के साथ उन्हें हर दिन जीना होगा। अपनों को खोने का दुःख असहनीय होता है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवारों को इस असीम पीड़ा को सहने की शक्ति प्रदान करें।
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One thought on ““वे पढ़ने गए थे… लौटे तो सिर्फ उनकी यादें आईं””
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