
Ram Mandir donation matter : अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है, जहां एक याचिका दायर कर दान राशि और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि मामले में एफआईआर दर्ज कराने के साथ-साथ सीबीआई से न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए।
याचिका अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी की ओर से दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और खर्च से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र बनाने की भी मांग की है, ताकि भक्तों द्वारा दिए गए योगदान का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इस विषय को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) ) का गठन किया है। इस टीम में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। एसआईटी को आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंदिर ट्रस्ट एसआईटी को पूरा सहयोग देगा और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जिला प्रशासन के साथ इस विषय पर बातचीत हुई है और प्रशासन ने सहयोग का आश्वासन दिया है।
दूसरी ओर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को लेकर सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ट्रस्ट का आंतरिक ऑडिट जारी है और अब तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जो लगाए गए आरोपों की पुष्टि करता हो। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट वित्तीय पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देगा।
विपक्षी दलों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे। कांग्रेस सहित कई अन्य दलों ने भी जांच की मांग का समर्थन किया है। वहीं, कुछ नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े वित्तीय मामलों में अधिक पारदर्शिता आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच के बाद अब सभी की नजरें आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो इससे मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब भी मिल जाएगा।
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