
WPI Inflation May 2026 : मई 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक अहम आंकड़ा सामने आया है, जिसने बाजार और आम उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान खींचा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देश की थोक महंगाई दर (WPI Inflation) बढ़कर 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। यह बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने के बाद नए आंकड़े जारी किए हैं। इस बदलाव का उद्देश्य आर्थिक डेटा को अधिक आधुनिक और वास्तविक बाजार परिस्थितियों के अनुसार बनाना है।
ईंधन और बिजली की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई
WPI Inflation में सबसे बड़ा योगदान ईंधन और बिजली सेक्टर का रहा है। मई में इस श्रेणी में महंगाई दर बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी। इसके अलावा, कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया। मई में इसकी महंगाई दर 61.51 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 56.31 प्रतिशत थी। इसका सीधा असर देश के ऊर्जा बाजार और परिवहन लागत पर पड़ा है।
खाद्य और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स पर असर
महंगाई का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों पर भी दिखाई दिया। खाद्य वस्तुओं की महंगाई मई में बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जो पहले 2.43 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Goods) में भी वृद्धि देखी गई और यह 7.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 6.68 प्रतिशत थी।
वैश्विक कारणों का बड़ा प्रभाव
थोक महंगाई में इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधाएं भारत की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं। भारत अपनी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात इन्हीं मार्गों से करता है। सप्लाई बाधित होने और वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू बाजार में भी कीमतें ऊपर गई हैं।
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई (CPI Inflation) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई 2026 में खुदरा महंगाई 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। यह पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और यह आरबीआई के 4% के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ सकता है।
RBI की नीति और महंगाई लक्ष्य
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से CPI यानी खुदरा महंगाई को ध्यान में रखता है। सरकार का लक्ष्य है कि महंगाई दर को 4% के आसपास (±2% के दायरे में) बनाए रखा जाए। हाल ही में RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था। यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे पेट्रोल और डीजल पर भी पड़ा है। मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होने की संभावना बढ़ गई है।
महंगाई कैसे मापी जाती है?
थोक महंगाई (WPI) : यह थोक व्यापारियों के बीच वस्तुओं की कीमतों पर आधारित होती है। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स: 63.75% , प्राइमरी आर्टिकल्स: 22.62% , फ्यूल एंड पावर: 13.15%
खुदरा महंगाई (CPI) : यह आम उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। फूड और प्रोडक्ट्स: 45.86% , हाउसिंग: 10.07% , फ्यूल और अन्य आइटम्स: शेष भाग
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