
रंजन कुमार सिंह
संगीत जगत में, लता मंगेशकर के समानांतर, अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली गायिका सुमन कल्याणपुर का 31 मई को 89 साल की उम्र में निधन हो गया।उन्होंने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी, कन्नड़, गुजराती, बंगाली और भोजपुरी जैसी कई भाषाओं में 3,000 से अधिक गाने गाए। मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही और उन्होंने “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे” और “ना तुम हमें जानो” जैसे कई सदाबहार युगल गीत गाए। भारतीय संगीत में उनके महान योगदान के लिए, भारत सरकार द्वारा उन्हें 2023 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था। संगीत जगत में एक अमिट छाप छोड़ने वालीं दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 31 मई 2026 को 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया है।
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सुमन कल्याणपुर भारतीय सिनेमा (विशेषकर हिंदी, मराठी और कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं) की एक बेहद प्रतिष्ठित पार्श्व गायिका थीं। अपनी सुरीली और मधुर आवाज के लिए जानी जाने वाली सुमन कल्याणपुर ने अपने शानदार करियर में 3000 से अधिक गीत गाए और संगीत के स्वर्ण युग (1950-1970 के दशक) में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। 28 जनवरी 1937 को ढाका (तत्कालीन बंगाल प्रेसिडेंट, ब्रिटिश भारत और वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था और उनका मूल नाम सुमन हेम्मादी था। उनके पिता, शंकर राव हेम्मादी, कर्नाटक के उडुपी जिले के हेम्मादी गाँव से थे और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। सुमन पाँच बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थीं। 1943 में उनका परिवार मुंबई (तब बॉम्बे) आ गया। संगीत में आने से पहले उनकी रुचि चित्रकला (Painting) में थी और उन्होंने प्रतिष्ठित ‘सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट’ से पढ़ाई की थी।
उनका विवाह रमानंद कल्याणपुर से हुआ था। उन्होंने केशवराव भोळे और उस्ताद अब्दुल रहमान खान जैसे दिग्गज शास्त्रीय संगीतकारों से गायन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने 1954 में अपनी पहली फिल्म ‘मंगु’ में गाने का मौका मिला, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।1960 और 1970 का दशक उनके करियर का स्वर्णकाल था। उनकी आवाज की मिठास और सादगी ने उन्हें बहुत लोकप्रिय बनाया। हिंदी के अलावा, उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, असमिया, कन्नड़, और ओडिया जैसी कई भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय और सदाबहार गीतों में ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ (ब्रह्मचारी), ‘ना जाने क्यों होता है’ (आनंद), ‘मुझे तुम से कुछ कहना है’ (बॉबी), और ‘तेरे हम ओ सनम’ शामिल हैं।
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गायिकी की शैली और पहचानआवाज की समानता: उनकी आवाज काफी हद तक महान गायिका लता मंगेशकर से मिलती-जुलती थी। कई बार लोग उनके गाए गीतों को लता जी के गीत समझ लेते थे, जिसके कारण उन्हें अक्सर “लता जी की प्रतिध्वनि” भी माना जाता था। उनकी आवाज की समानता और असाधारण प्रतिभा के कारण, कई फिल्म निर्माता उन्हें अपनी फिल्मों में लेते थे, जब वे किसी कारणवश लता मंगेशकर को नहीं ले पाते थे। 31 मई 2026 को मुंबई के लोखंडवाला स्थित अपने आवास पर उन्होंने 89 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके अंतिम संस्कार को मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया गया।संगीत की दुनिया में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
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