
रिशु श्री केस की ED जांच में रोज़ हो रहे नये खुलासे,
रंजन कुमार सिंह
पिता दवाई बेचता था। बेटा बीएमडब्ल्यू से चलने लगा।
13 साल में शून्य से अरबपति 2.5 करोड़ की गाड़ियाँ।
61 जमीनें। 5 कंपनियां। करोड़ों के जेवरात।
और यूरोप-ऑस्ट्रेलिया घूमते आईएएस अफसर।
पटना के रिशु श्री की कहानी
किसी फिल्म जैसी लगती है।
पर यह फिल्म नहीं, यह बिहार के टैक्सपेयर का पैसा है।
बैकग्राउंड क्या है?
2012 पटना एनआईटी से बीटेक।
बाप की दवा की दुकान।
आमदनी सीमित।
ख्वाहिश असीमित।
2013 में एक गुजराती कंपनी में नौकरी मिली।
काम था BUIDCO के लिए पटना में पानी की टंकी बनाना।
पर रिशु को टंकियों में नहीं
सिस्टम में दिलचस्पी थी।
उसने एक चीज बहुत जल्दी सीख ली
कौन-सा दरवाजा किस चाबी से खुलता है।
वो चाबी थी — तीन फीसदी।
जी हां
हर सरकारी टेंडर का 3% कमिशन।
इंजीनियर को।
अधिकारी को।
जिसको जितना चाहिए।
स्टेट विजिलेंस यूनिट एसवीयू की जांच में यह बात खुद रिशु ने ED के सामने कबूल की।
3% — यह सिर्फ एक नंबर नहीं।
यह बिहार की नौकरशाही की नब्ज थी।
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जो इसे जानता था
वो मालिक बन जाता था।
आरोप 1 अगले 13 सालों में 5 कंपनियां।
12 टेंडर अकेले जल संसाधन विभाग से।
61 जमीन की डीड- अलग-अलग शहरों में।
बीएमडब्ल्यू, पोर्शे मैकन, डिस्कवरी स्पोर्ट्स- ढाई करोड़ की गाड़ियां।
16 महीने में 13 बार विदेश।
आरोप 2 और आईएएस अफसर योगेश कुमार सागर यूरोप गए।
विएना, साल्जबर्ग, वोल्फगैंग।
8 परिवार के सदस्यों के साथ।
21.92 लाख का खर्च-रिशु का।
आरोप 3 आईएएस अभिलाषा शर्मा
उनके घर की छत पर बागवानी हुई।
9 लाख का टैरेस गार्डन-रिशु का सहयोग।
चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा था
“जो अधिकारी राजकोष में हाथ डाले
उसे वैसे ही पकड़ो
जैसे जीभ पर शहद की पहचान होती है
चखे बिना छुपता नहीं।”
ढाई हजार साल पहले की बात।
आज 2026 में एसवीयू की 11 घंटे की छापेमारी में
वही शहद बरामद हुआ।
2.25 करोड़ के गहने।
61 डीड।
2.5 लाख कैश।
इस खेल में रिशु के साथी कई बड़े बड़े लोग थे।
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चीफ इंजीनियर तारिणी दास के घर से-8.53 करोड़ कैश।
संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी के यहां से 2 करोड़।
BUIDCO के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से 1 करोड़।
यह सिर्फ रिशु की लालच का परिणाम नहीं था।
यह एक पूरे सिस्टम की आदत थी।
हम सब जिस बिहार के सपने देखते हैं
उसके पैसों पर यह लोग यूरोप घूम रहे थे।
27 मई 2026
एसवीयू ने दरवाजा खटखटाया।
रिशु विदेश भागने की तैयारी में था।
गिरफ्तारी हुई।
अब दो आईएएस अफसर सस्पेंड हैं।
बाकी एसवीयू के रडार पर हैं।
यह अंत नहीं।
यह शुरुआत है।
पर एक सवाल जो दिमाग को परेशान कर रहा है
रिशु ने पहला टेंडर मैनेज किया।
पहली बार किसी इंजीनियर को 3% दिया।
उस दिन उस इंजीनियर ने
हां कहा।
वो पहली ‘हां’- कहां से आई होगी? क्या सिर्फ उस इंजीनियर से या फिर उसके कई ऊपर से?
इसी बीच सांसद पप्पु यादव ने तो बड़े-बड़े आरोप लगा दिये हैं जिसमें नेता-अधिकारियों तक युवतियों को भेजने और सेक्स रैकेट के भी आरोप हैं। जांच जारी है। देखते हैं आगे क्या होता है।
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बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार हाई-प्रोफाइल ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री को लेकर प्रवर्तन निदेशालय और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में लगातार सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशुश्री ने सरकारी टेंडरों से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के लिए एक संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा था, जिसकी जड़ें कई विभागों और अधिकारियों तक फैली हुई थीं।
अफसरों की निजी जिंदगी तक की रखता था पूरी जानकारी
ED की जांच में सामने आया है कि रिशुश्री सिर्फ सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं था। वह कई वरिष्ठ अधिकारियों, उनकी पत्नियों की शादी की सालगिरह और बच्चों के जन्मदिन तक की जानकारी अपने पास दर्ज रखता था। जांच एजेंसियां इसे प्रभाव और संपर्क मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रही हैं।
फर्जी बिलों के जरिए चलता था करोड़ों के कमीशन का नेटवर्क
ईडी के मुताबिक टेंडर हासिल करने के बाद रिशु श्री सीधे सामने नहीं आता था। वह अपने करीबी लोगों को सब-कॉन्ट्रेक्टर बनाकर काम करवाता था ताकि पूरी प्रक्रिया कागजों पर वैध दिखाई दे। इसके बाद वास्तविक लागत से कहीं अधिक राशि के बिल तैयार किए जाते थे।
बढ़े हुए बिलों से फिक्स होता था 8 से 10 फीसदी कमीशन
जांच एजेंसियों का दावा है कि फर्जी और बढ़े हुए बिलों का इस्तेमाल अधिकारियों को दिए जाने वाले कमीशन और कथित रिश्वत की रकम को छिपाने के लिए किया जाता था। इन भुगतानों को सामान्य कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाकर संदेह से बचने की कोशिश की जाती थी।
रिशु से संपर्क करो, टेंडर पक्का समझो
ईडी के अनुसार विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर जारी होने के बाद कई कंपनियां रिशु श्री से संपर्क करती थीं। वह उन्हें योग्य ठेकेदार के रूप में स्थापित कर टेंडर दिलाने की पूरी व्यवस्था करता था। इसके बदले कुल परियोजना लागत का 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था।
बड़े अधिकारियों तक पहुंचता था कमीशन का हिस्सा
जांच एजेंसी का कहना है कि वसूले गए कमीशन का बड़ा हिस्सा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावशाली कर्मचारियों के बीच बांटा जाता था। इसी वजह से पूरे नेटवर्क को लंबे समय तक संरक्षण मिलता रहा।
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निलंबित IAS अफसरों पर FIR की तलवार
रिशु श्री के कथित खर्च पर देश-विदेश यात्राएं करने और अनुचित लाभ लेने के आरोपों में निलंबित IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है।
अनुमति मिली तो जल्द दर्ज होगा केस
जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद दोनों IAS अधिकारियों के खिलाफ जल्द FIR दर्ज की जा सकती है। यदि अनुमति नहीं मिलती है तो उन्हें गंभीर विभागीय जांच का सामना करना पड़ सकता है।
अदालत में 14 वकीलों की फौज भी नहीं दिला सकी राहत
सुनवाई के दौरान रिशु श्री की ओर से 14 वकीलों की टीम ने अदालत में जोरदार पैरवी की। दूसरी ओर ईडी और विजिलेंस की संयुक्त टीम के 11 वकील अदालत में मौजूद रहे। दोनों पक्षों ने कई पुराने मामलों और कानूनी मिसालों का हवाला दिया।
“मैं लोकसेवक नहीं हूं” वाली दलील भी हुई खारिज
रिशु श्री की ओर से अदालत में कहा गया कि वह कोई लोकसेवक नहीं है, इसलिए उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि केवल लोकसेवक न होने के आधार पर किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार के मामलों से बाहर नहीं रखा जा सकता।
अब पुलिस रिमांड की तैयारी, पूछताछ में खुल सकते हैं और बड़े राज
SVU सूत्रों के मुताबिक रिशु श्री से गहन पूछताछ के लिए उसे पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। सोमवार को एसवीयू कोर्ट में इस संबंध में आवेदन दायर किया जा सकता है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान कई और बड़े नाम तथा नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
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