दो टूक : सरकार माने भले न, पर कांकरोच जनता पार्टी से परेशानी में तो है…

Cockroach People's Party

Cockroach People’s Party अपने देश में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी अजीबो-गरीब हलचल देखने को मिल रही है। वैसे तो देश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी डिजिटल दुनिया और चुनावी राजनीति दोनों में खुद को सबसे मजबूत मानती है लेकिन उसे एक कांकरोच से कड़ी टक्कर मिल रही है। टक्कर ऐसी कि उसे बार-बार ब्लाक किया जा रहा है। इंस्टाग्राम पर कांकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से एक व्यंगात्मक अकाउंट ने देखते ही देखते करोड़ों फालोअर्स बटोर लिये और यह संख्या इतनी बड़ी हो गयी कि भाजपा के आधिकारिक हैंडल से भी आगे निकल गयी। हालत यह है कि एक्स पर उसका अकाउंट बंद हो गया। इसके कर्ता-धताã को धमकियां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर भाजपा के लोगों ने इसको पाकिस्तान और नेपाल द्बारा प्रायोजित करार देने में अपनी सारी ताकत लगानी शुरू कर दी है। हद तो आज तब हो गयी जब इसे सोनम वांगचुक ने भी अपना समर्थन देते हुए कहा कि मैं भी कांकरोच हूं।

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पहली नजर में यह सिर्फ जेन-जी का एक डिजिटल समूह लग रहा है लेकिन गहरायी से देखें तो असल में यह देश के करोड़ों शिक्षित और बेरोजगार युवाओं के भीतर सुलग रहे असंतोष, हताशा और व्यवस्था के प्रति गुस्से का एक अनोखा और अहिंसक विस्फोेट ही है। इस पूरे आंदोलन की शुरुआत राजनीति से नहीं बल्कि सीजेआई (चीफ जस्टिस आफ इंडिया सूर्यकांत) द्बारा एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं की तुलना कांकरोच और परजीवी से करने की खबर जैसे ही फैली कि इंटरनेट पर युवाओं का आक्रोश भड़क गया और इस आक्रोश को मंच दिया कांकरोच जनता पार्टी ने। हालांकि बाद में सीजेआई ने सफाई दी कि उनका इरादा फर्जी डिग्री धारकों की आलोचना करना था, लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था।

अभिजीत ने इस अपमान को एक हथियार बनाया और कारतूस बनाया युवाओं को। उन्होंने कांकरोच जनता पार्टी की नींव रखी। दरअसल कांकरोच एक ऐसा जीव है जिसे सबसे तुच्छ समझा जाता है, सब कुचलने की कोशिश करते हैं लेकिन वह हर विपरीत स्थिति में जीवित बच जाता है। युवाओं ने इस नाम को एक सम्मान के प्रतीक की तरह अपना लिया। उनका नारा बन गया कि उन्होंने हमें कुचलने की कोशिश की और हम फिर वापस आ गये। भारत आजकल भले ही दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का दावा करता हो लेकिन एक कड़वी सच्चाई रोजगारविहीन विकास भी है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट बताती है कि देश में ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी दर बेहद चिंताजनक है। हर साल लाखों छात्र डिग्री लेकर निकलते हैं लेकिन पर्याप्त नौकरियां हैं ही नहीं। कांकरोच जनता पार्टी की सफलता का कारण इन दिनों नीट पेपर लीक भी है जिसने युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

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जब युवाओं को लगा कि पारंपरिक राजनीतिक दल या मुख्यधारा का मीडिया उनकी इस पीड़ा को गंभीरता से नहीं उठा रहा है तो उन्होंने खुद का डिजिटल स्पेस खड़ा कर लिया और वह मंच कांकरोच जनता पार्टी बन गया। इस कांकरोच जनता पार्टी ने बेरोजगारी, आलसी, हर वक्त आनलाइन रहना और पेशेवर तरीके से भड़ास निकालने को लपका। इससे जुड़कर युवाओं ने अपने मन की मांगे भी रख दी मसलन परीक्षाओं में पारदर्शिता, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, संसद में लैंगिक समानता और मीडिया की स्वतंत्रता। यहां तक कि कांकरोच की डेस पहनकर दिल्ली में युवाओं ने सफाई अभियान चलाया और विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया। मतलब साफ है कि युवाओं ने डिजिटल फ्रेम से निकलकर इसे जमीन पर खड़ा करने की कोशिश भी की।
इस कांकरोच जनता पार्टी की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आनलाइन नियमों का हवाला देकर इस आंदोलन के एक्स अकाउंट को भारत में ब्लाक करा दिया। भाजपा नेता इसे एक सोची-समझी विपक्ष की साजिश करार देते हैं। वह इसे अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाला बताते हैं। उनका मानना है कि इसके फालोअर्स बोट्स और विदेशी हैं। जबकि कांग्रेस नेता शशि थरूर इसे युवाओं के वास्तविक दर्द की अभिव्यक्ति करार देते हैं।

उन्होंने कहा कि चाहे इसके पीछे कोई भी हो लेकिन यह तय है कि देश का युवा बेरोजगारी और महंगाई से बुरी तरह परेशान है ओर सरकार व विपक्ष दोनों को इस असंतोष को सुनना पड़ेगा। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दोपहर 1.14 बजे एक्स पर कहा- सरकार ने हमारी वेबसाइट बंद कर दी है। उस पर 10 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। 6 लाख लोगों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग वाली याचिका पर साइन किए थे। मेरा पर्सनल अकाउंट भी हैक कर लिया गया है। अभिजीत ने लिखा- सरकार कॉकरोच से इतनी डरी हुई क्यों है? लेकिन यह तानाशाही रवैया भारत के युवाओं की आंखें खोल रहा है। आप अकाउंट को हैक करके उन पर रोक लगा सकते हैं, लेकिन आप इस आंदोलन को हैक नहीं कर सकते। उधर, पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने ‘कॉकरोच मूवमेंट’ का समर्थन किया है।

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उन्होंने कहा- मैं न बेरोजगार हूं, न आलसी, इसलिए पार्टी का सदस्य नहीं बन सकता। लेकिन मैं खुद को ऑनरेरी कॉकरोच मानता हूं।’ अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्हें वॉट्सएप पर जान से मारने की धमकियां मिली हैं। उन्होंने स्क्रीन शॉट भी शेयर किए हैं। इसके अलावा दीपके पहली ऑनलाइन पिटीशन लेकर आए। इसमें उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। शनिवार सुबह 10 बजे तक ऑनलाइन पिटीशन में 5 लाख 68 हजार से ज्यादा लोग साइन कर चुके हैं। कुल मिलाकर यह ट्रेंड दिखाता है कि बड़ी संख्या में लोग मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हैं। युवाओं और आम लोगों के भीतर नाराजगी लगातार बढ़ रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बेरोजगारी, महंगाई और अवसरों की कमी जैसे मुद्दों ने युवाओं में असंतोष पैदा किया है। सोशल मीडिया पर उभर रहे ऐसे कैंपेन उसी नाराजगी की अभिव्यक्ति हैं। सरकार को इसे केवल मजाक या मीम कल्चर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह संकेत है कि लोगों के भीतर व्यवस्था को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है।

राजेश श्रीवास्तव

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