अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल सप्लाई और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने दावा किया है कि सऊदी अरब अमेरिकी नीतियों को लेकर निजी तौर पर चिंता जता रहा है और खाड़ी क्षेत्र में संभावित नाकेबंदी (Blockade) से बचने की अपील कर रहा है।
होर्मुज और बाब अल-मंडेब को लेकर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब का मानना है कि अगर Iran पर दबाव बढ़ता है और वह जवाबी कार्रवाई करता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र के समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। खासकर Strait of Hormuz को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम रास्ता है। इसके अलावा बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य भी एक और महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जहां किसी भी तरह की बाधा पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है।
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सऊदी अरब की रणनीतिक चिंता
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब निजी तौर पर वॉशिंगटन से कह रहा है कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो दोनों प्रमुख समुद्री मार्ग खतरे में पड़ सकते हैं। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, अगर हालात बिगड़ते हैं और यमन में सक्रिय हूती विद्रोही समूह किसी बड़े हमले या नाकेबंदी में शामिल होता है, तो इसका सीधा असर तेल निर्यात पर पड़ेगा।
लाल सागर रूट पर भी खतरा
सऊदी अरब ने अपने तेल निर्यात को कुछ हद तक लाल सागर मार्ग की ओर शिफ्ट किया है, लेकिन अगर स्थिति और बिगड़ती है तो यह रास्ता भी असुरक्षित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों प्रमुख चोकपॉइंट प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के विदेश नीति सलाहकारों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि तेहरान इन समुद्री मार्गों को रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि किसी भी बड़े टकराव की स्थिति में पूरा खाड़ी क्षेत्र ऊर्जा संकट की चपेट में आ सकता है।
