आज है कामदा एकादशी 2026: मनोकामना पूरी करने का पवित्र अवसर

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राजेन्द्र गुप्ता

सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना विशेष महत्व होता है, परंतु चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है, विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। यह एकादशी हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का अवसर प्रदान करती है। मान्यता है कि इस पावन दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर जीवन के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। “कामदा” शब्द का अर्थ ही है कामनाओं को पूरा करने वाली। इसलिए यह व्रत भक्तों की उचित इच्छाओं की पूर्ति करने वाला माना गया है।

कब है कामदा एकादशी 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को सुबह 08 बजकर 45 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 मार्च को सुबह 07 बजकर 46 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 29 मार्च 2026 को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

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पारण का समय 30 मार्च को प्रातः 6 बजकर 31 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट के मध्य रहेगा।

कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में कामदा एकादशी को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अपने पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन के पापों से मुक्त हो सकता है। ऐसी भी मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति को मुक्ति दिलाकर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यही कारण है कि भक्त इस दिन भगवान विष्णु का नाम-स्मरण, भजन और ध्यान करते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ इस एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कामदा एकादशी व्रत की पूजा विधि

कामदा एकादशी के दिन भक्तों को निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए-

  • प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें।
  • उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
  • दिन भर भगवान विष्णु के भजन, कथा और कीर्तन करें।
  • रात्रि में जागरण और भक्ति भाव से भगवान का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि-विधान से व्रत का पारण करें।

एकादशी पर दान का महत्व

सनातन परंपरा में एकादशी पर दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है, विशेषकर एकादशी जैसे पवित्र दिन पर किया गया दान अनेक गुना फल प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान देने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है।

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दान के महत्व का उल्लेख करते हुए श्रीमद् भगवतगीता में कहा गया है-

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।।

अर्थात् जो दान कर्तव्य समझकर, बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के, उचित समय और योग्य व्यक्ति को दिया जाता है, वही सात्त्विक दान कहलाता है।

कामदा एकादशी पर क्या दान करें?

सनतान परंपरा में अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ दान कहा गया है। कामदा एकादशी पर दीन-हीन, असहाय, निर्धन लोगों को भोजन करवाना या अन्न का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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