दुर्गाष्टमी व श्रीराम नवमी आज: कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का होगा समापन, जानें तिथि व महत्व

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कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का होगा समापन

राजेन्द्र गुप्ता

कन्या पूजन  : चैत्र नवरात्रि का पर्व अब समापन की ओर है। लेकिन उससे पहले कन्या पूजन का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम दो दिन अष्टमी और नवमी तिथि पर विशेष रूप से कन्या पूजन किया जाता है, जिसे देवी की साक्षात उपासना का रूप माना गया है। मान्यता है कि, छोटी कन्याओं में मां दुर्गा का वास होता है, इसलिए उनका पूजन कर भक्त अपने व्रत को पूर्णता प्रदान करते हैं और देवी की कृपा प्राप्त करते हैं। हालांकि, कई बार तिथियों के एक ही दिन होने पर अष्टमी-नवमी को लेकर असमंजस बना रहता है।

रामनवमी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुकल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी ओर 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में कोई भी पर्व उदयातिथि के अनुसार मनाया जाता है। लेकिन कहते हैं कि भगवान श्रीराम को जन्म मध्याह्न काल में हुआ था और इसलिए रामनवमी 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. हालांकि, वैष्णव संपद्राय के लोग राम नवमी 27 मार्च को मनाएंगे।

कब है अष्टमी 2026?

  • इस बार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 25 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर हो रही है।
  • इस तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर माना जा रहा है
  • उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि में 26 मार्च 2026, गुरुवार को अष्टमी होगी और कन्या पूजन किया जाएगा।ये भी पढ़ें

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दुर्गा अष्टमी का महत्व

दुर्गा अष्टमी, जिसे महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना कर उनसे शक्ति, साहस और रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं। कई भक्त इस अवसर पर विधिपूर्वक व्रत रखते हैं और घरों तथा मंदिरों में भव्य पूजा का आयोजन करते हैं। अष्टमी तिथि पर ‘कन्या पूजन’ का विशेष महत्व होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें प्रसाद अर्पित किया जाता है।

रामनवमी का महत्व

नवरात्रि का नौवां दिन रामनवमी के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्रीराम के पावन जन्मोत्सव का प्रतीक है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था से भरा होता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, रामायण का पाठ होता है, भजन-कीर्तन और भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। भक्तजन पूरे दिन भक्ति में लीन रहकर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को स्मरण करते हैं। कई श्रद्धालु इसी दिन अपने नवरात्रि व्रत का विधिपूर्वक समापन करते हैं और प्रसाद ग्रहण कर उत्सव मनाते हैं। यह पर्व धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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अष्टमी और नवमी के प्रमुख अनुष्ठान

देशभर में इन दोनों दिनों पर विभिन्न परंपराएं निभाई जाती हैं, हालांकि कुछ प्रमुख अनुष्ठान लगभग हर जगह समान रूप से किए जाते हैं-

कन्या पूजन: 9 छोटी कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन और उपहार दिए जाते हैं।

व्रत: कई लोग अष्टमी या नवमी तक उपवास रखते हैं।

हवन: घरों और मंदिरों में शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा के लिए हवन किया जाता है।

विशेष भोग: पूड़ी, चना और हलवा जैसे व्यंजन बनाकर देवी को अर्पित किए जाते हैं।

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