सरकारी विद्यालयों में सजी नवदुर्गा, 2.33 लाख बच्चों ने गढ़े शक्ति के प्रतीक

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  •  नन्हें हाथों की रचनात्मकता में दिखी नारी शक्ति की विराट छवि
  • छात्र-छात्राओं द्वारा बनाये गये नवदुर्गा के नौ स्वरूपों से जागी महिला सशक्तिकरण की चेतना
  •  ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से प्रदेश सरकार बालिकाओं को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना रही है: संदीप सिंह

लखनऊ। चैत्र नवरात्रि के पावन शुभारंभ के साथ उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में आस्था, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘मिशन शक्ति’ के छठे चरण के पहले दिन प्रदेश के समस्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालयों एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित पोस्टर निर्माण और विचार-विमर्श का व्यापक आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान के अंतर्गत 2.33 लाख बच्चों ने नवदुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री पर आधारित आकर्षक पोस्टर तैयार किए। इन कलात्मक अभिव्यक्तियों में शक्ति, साहस, करुणा और आत्मनिर्भरता के भावों को प्रभावी ढंग से उकेरा गया। विद्यालय परिसरों में सजी रंग-बिरंगी कृतियों ने न केवल बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को नई उड़ान दी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी नारी शक्ति को केवल पूजनीय नहीं, बल्कि परिवर्तन और नेतृत्व की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार कर रही है। मंत्री ने कहा कि  बेसिक शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश संदीप सिंह का कहना है कि ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से प्रदेश सरकार बालिकाओं को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर नवदुर्गा के स्वरूपों के माध्यम से बच्चों को नारी शक्ति के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराना एक अभिनव पहल है। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला है। बालिकाओं के भीतर आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास कर्ने वाला भी है।

माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों से आत्मबल का संचार

इस अवसर पर विद्यालयों में नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप से जुड़ी विशेषताओं साहस, संयम, सेवा, ज्ञान और नेतृत्व को बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास से जोड़कर विस्तार से समझाया गया। इससे विद्यार्थियों में यह विश्वास और मजबूत हुआ कि वे भी इन गुणों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

चर्चा में बालिकाओं को मिला ज्ञान

आयोजित चर्चाओं में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि ‘मिशन शक्ति’ केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि लैंगिक समानता स्थापित करने का एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है।

बालिका शिक्षा और आत्मविश्वास को मिली नई दिशा

पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु बालिका सशक्तिकरण रहा। इस दौरान बालिकाओं ने निर्भीक होकर अपने विचार साझा किए, अपने सपनों को स्वर दिया और यह संदेश दिया कि वे अब सीमाओं में बंधने वाली नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए तैयार हैं। यह अभियान विद्यालयों की चारदीवारी से निकलकर अभिभावकों और स्थानीय समुदाय तक भी पहुंचा, जिससे समाज में सकारात्मक जागरूकता का वातावरण निर्मित हुआ।

महानिदेशक स्कूल शुक्षा ने कहा 

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश, मोनिका रानी का कहना है कि ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित यह गतिविधियां बालिकाओं के भीतर आत्मविश्वास, आत्मबल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी जा रही है।

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