ऐतिहासिक रहा नेपाल का इस बार का चुनाव

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  • मतदान से मतगणना तक की पुलिस की विशेष रणनीति प्रभावी रही

     कमल रायमाझी

काठमांडू । साल 2023 में हुए प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय सभा चुनावों की तुलना में 2026 को सम्पन्न प्रतिनिधि सभा सदस्य चुनाव अपेक्षाकृत अधिक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में सम्पन्न हुआ है। चुनाव अवधि के दौरान प्रभावी सुरक्षा रणनीति, सुरक्षाकर्मियों की सक्रिय तैनाती तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के कारण इस बार मतदान प्रक्रिया सुरक्षित, व्यवस्थित और भयमुक्त वातावरण में सम्पन्न होने की बात संबंधित पक्षों ने कही है। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए नेपाल पुलिस ने बहुआयामी सुरक्षा योजना लागू की थी। मतदान स्थल और मतदान केंद्रों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के कारण मतदाताओं ने निर्भय होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नेपाल पुलिस ने अधिकतम क्षमता का उपयोग करते हुए चुनाव को निष्पक्ष, सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस आई जी दान बहादुर कार्की के अनुसार सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ परिचालित किया गया तथा देशभर के पुलिस इकाइयों को उच्च सतर्कता पर रखा गया था। पुलिस मुख्यालय के अनुसार चुनाव सुरक्षा के लिए मुख्यतः पाँच प्रमुख रणनीतियाँ अपनाई गई थीं। पहली रणनीति के तहत सुरक्षा जोखिम का मूल्यांकन कर मजबूत सुरक्षा योजना तैयार की गई। दूसरी रणनीति के रूप में सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया। तीसरी रणनीति के तहत हाल के आंदोलनों के कारण कुछ कमजोर पड़े पुलिस मनोबल को मजबूत करने के लिए संगठन के भीतर विशेष पहल की गई। चौथी रणनीति के तहत सुरक्षा निकायों, राजनीतिक दलों, प्रशासन तथा अन्य सरोकार वाले पक्षों के साथ प्रभावी समन्वय कायम किया गया। पाँचवीं रणनीति के रूप में चुनाव अवधि के दौरान निरंतर निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत किया गया।

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पुलिस मुख्यालय की सूचना शाखा के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक कार्की ने स्वयं विभिन्न प्रांतों और जिलों के पुलिस इकाइयों का स्थलगत निरीक्षण, सुपरिवेक्षण तथा ब्रीफिंग कार्यक्रम किया। इससे सुरक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ाने और सुरक्षा प्रबंधन को प्रभावी बनाने में मदद मिली। इस बार के चुनाव में नेपाल पुलिस ने डिजिटल तकनीक के उपयोग को भी विशेष प्राथमिकता दी। सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और फेक न्यूज को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक जिले में सोशल मीडिया निगरानी टोली गठित की गई थी। इन टीमों ने ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित भ्रामक सामग्री की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई तथा सामग्री हटाने का कार्य भी किया। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरा, उच्च क्षमता वाले कैमरे तथा अनुसन्धान में डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया गया। सुरक्षा स्थिति के अनुसार संगठनात्मक कमान संरचना को व्यवस्थित करते हुए प्रांत स्तर पर अतिरिक्त महानिरीक्षक के नेतृत्व में सुरक्षा कमांड स्थापित किया गया, जबकि जिला स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को भी प्रभावी बनाया गया। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के साथ संयुक्त रूप से सुरक्षा निगरानी, जोखिम मूल्यांकन तथा संभावित विवाद समाधान के लिए सहयोग किया गया।

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उल्लेखनीय है कि 2023 के चुनाव के दौरान देश के विभिन्न जिलों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच कई स्थानों पर झड़पें हुई थीं। बाजुरा, रुकुम और कालीकोट में हुई हिंसक घटनाओं में आठ लोगों की मौत हुई थी, जबकि इलाम, सर्लाही, दोलखा, दाङ, नवलपरासी पश्चिम, हुम्ला, धादिङ, ललितपुर, तनहुँ, म्याग्दी, खोटाङ और भोजपुर सहित कई जिलों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। कुछ स्थानों पर विस्फोटक पदार्थ रखने तथा मतदान में अवरोध डालने की घटनाएँ भी सामने आई थीं। हालांकि 2026 के चुनाव में इस तरह की गंभीर घटनाएँ सामने नहीं आईं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार मतदान केंद्रों पर कड़ी और व्यवस्थित सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण किसी बड़े हिंसक टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। कुछ स्थानों पर मामूली तनाव की स्थिति जरूर बनी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर हालात को सामान्य बना दिया।

संविधानविद् और कानुन व्यवसायी सूर्य अधिकारी के अनुसार चुनाव का शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न होना प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन का परिणाम है। वहीं सुरक्षा विश्लेषक तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सहप्राध्यापक उमेश चन्द्र रिजाल का कहना है कि पिछले अनुभवों के आधार पर सुरक्षा रणनीति में सुधार किए जाने से संभावित जोखिमों को कम करने में सफलता मिली। अधिकारकर्मी लक्ष्मी केसी ने भी कहा कि चुनाव अवधि के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उच्च जिम्मेदारी के साथ भूमिका निभाई, जिसके कारण कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सकारात्मक संदेश मिला है।
नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता पुलिस नायब महानिरीक्षक अवि नारायण काफ्ले के अनुसार चुनाव से पहले ही देशभर के मतदान केंद्रों को संवेदनशील, अति संवेदनशील और सामान्य श्रेणी में वर्गीकृत कर सुरक्षा योजना तैयार की गई थी। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त परिचालन और समन्वय के कारण संभावित जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जा सका।

सुरक्षा निकायों का कहना है कि मानवीय क्षति के दृष्टिकोण से भी 2026 का चुनाव 2023 की तुलना में काफी शांतिपूर्ण रहा। पिछले चुनावों में देखने को मिली झड़प, विस्फोटक रखने के प्रयास और मतदान में अवरोध जैसी घटनाएँ इस बार नहीं दोहराई गईं। विश्लेषकों के अनुसार चुनाव आयोग, सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन, राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच सहयोग और जिम्मेदार भूमिका के कारण 2026 का प्रतिनिधि सभा चुनाव नेपाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव के रूप में स्थापित हुआ है। सुरक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अनुशासित परिचालन, प्रभावी सुरक्षा रणनीति और नेतृत्व की सक्रिय भूमिका के कारण नेपाल पुलिस ने चुनाव को सुरक्षित वातावरण में सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूर्व पुलिस अधिकारियों के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक कार्की के नेतृत्व संभालने के बाद संगठन की पेशेवर क्षमता, तकनीक के उपयोग और समन्वय प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस बार चुनाव के दौरान पहली सुरक्षा घेरा बनकर कार्य कर रही पुलिस संगठन की सक्रियता और प्रभावी प्रबंधन को सुरक्षा क्षेत्र में नेतृत्व की सफलता के उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है।

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