रंग पंचमी आज: जानिए पर्व का महत्व व पूजा विधि, शुभ रंग और सही तिथि

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राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू धर्म में रंग पंचमी के पर्व का खास महत्व होता है। यह पर्व हर साल होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को देव पंचमी भी कहा जाता है। क्योंकि मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इस लिए जब रंग पंचमी के दिन भक्त होली खेलते हैं, तो आसमान की तरफ गुलाल-रंग उड़ाते हैं। साथ ही यह पर्व द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है।

कब है रंग पंचमी 2026

हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार रंग पंचमी का त्योहार 8 मार्च को मनाया जाएगा। क्योंकि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से होगी और इसका समापन 8 मार्च 2026 को रात 9 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 8 मार्च को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।

रंग पंचमी पूजन सामग्री

रंग पंचमी की पूजा के लिए विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से लाल, पीला, हरा, नीला, और सफेद रंग के फूलों का समावेश होता है। इसके अलावा, पूजा में ताम्बे का पानी, गंगाजल, दीया, अगरबत्ती, चंदन, मिष्ठान, तथा हल्दी-कुमकुम का उपयोग भी किया जाता है। पूजा के दौरान देवी-देवताओं की तस्वीर या प्रतिमा के सामने इन रंगों के फूलों से सजावट की जाती है। साथ ही, भक्तों को रंग खेलने के लिए विभिन्न प्रकार के रंगों की पिचकारियां, गुलाल, और रंगीन पानी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

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रंग पंचमी पूजा विधि

  • रंग पंचमी के दिन पूजा की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के ध्यान से करनी चाहिए।
  • सबसे पहले स्नान करना चाहिए और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है।
  • सूर्य देवता जीवन के स्रोत माने जाते हैं, और उन्हें अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान कृष्ण और राधा रानी की प्रतिमा को स्थापित करें।
  • लाल और पीला रंग शुभता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं, और इन रंगों का इस्तेमाल पूजा में शांति और सकारात्मकता को बढ़ाता है।
  • फिर भगवान की विधिपूर्वक अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के दौरान पानी, दूध, शहद, – गुलाब जल आदि का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
  • इसके बाद, चंदन, अक्षत और गुलाब के फूलों से भगवान को अर्पित करें। यह फूल और चंदन भगवान को प्रिय होते हैं, और इनसे पूजा का माहौल और भी शुद्ध होता है।
  • पूजा के दौरान मंत्र और श्री कृष्ण की आरती जरूर करें।
  • आप पूजा के दौरान “ॐ श्री कृष्णाय नमः” के मंत्र का जाप कर सकते हैं।
  • इसके बाद, खीर, पंचामृत और फल आदि का भोग भगवान को अर्पित करें।
  • पूजा के अंत में प्रसाद का वितरण करना न भूलें।ये भी पढ़ें

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क्यों मनाया जाता है रंग पंचमी का पर्व?

रंग पंचमी पर्व के पीछे मान्यता है कि इस दिन देवलोक से सभी देवी-देवता पृथ्वी पर होली खेलने के लिए आते हैं। रंग पंचमी से जुड़ी मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी और इस होली में जहां देवी-देवताओं ने उन पर पुष्प की वर्षा की थी। राधा-कृष्ण की इस होली में उनके साथ ग्वाले और गोपियों ने भी रंगोत्सव मनाया था। कुछ इसी आस्था को लिए लोग इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा की विशेष रूप से पूजा करते हैं और देवी-देवताओं का ध्यान करते हुए हवा में अबीर और गुलाल फेंकते है।

रंग पंचमी का शुभ रंग

होली के पांचवें दिन मनाए जाने वाले रंग पंचमी का पर्व जिसे देव पंचमी ओर कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यदि भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को शुभ रंग से जुड़े गुलाल अर्पित किए जाएं तो शीघ्र ही उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू मान्यता के लिए रंग पंचमी पर लाल और गुलाबी रंग के गुलाल को पूजा में अर्पित करना अत्यंत ही शुभ माना गया है।

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