इंग्लैंड की प्रमुख फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट लीग द हंड्रेड को लेकर हाल के दिनों में एक बड़ा विवाद सामने आया था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट से बाहर रखा जा सकता है। इन खबरों के बाद क्रिकेट जगत में हलचल तेज हो गई थी। अब इस पूरे मामले पर इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
ECB ने साफ शब्दों में कहा है कि द हंड्रेड एक समावेशी प्रतियोगिता है और इसमें किसी भी देश के खिलाड़ियों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। बोर्ड के अनुसार खिलाड़ियों का चयन केवल उनके प्रदर्शन, उपलब्धता और टीम की जरूरतों के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भी अन्य देशों के खिलाड़ियों की तरह समान अवसर मिलेगा। दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब BBC की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ फ्रेंचाइज़ी टीमें आगामी ऑक्शन में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह आशंका जताई जाने लगी कि राजनीतिक परिस्थितियों का असर क्रिकेट लीगों पर भी पड़ सकता है। इस खबर ने खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों के बीच चिंता पैदा कर दी थी।
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इस बार द हंड्रेड के ऑक्शन के लिए कुल 67 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने अपना नाम दर्ज कराया है, जिनमें पुरुष और महिला दोनों वर्ग के खिलाड़ी शामिल हैं। इससे यह साफ है कि पाकिस्तान क्रिकेट समुदाय इस लीग को लेकर काफी उत्साहित है और खिलाड़ी इसमें अपनी प्रतिभा दिखाने के इच्छुक हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी 2009 के बाद से इंडियन प्रीमियर लीग में हिस्सा नहीं ले पाए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के कारण यह स्थिति बनी हुई है। ऐसे में द हंड्रेड जैसी लीगों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि क्रिकेट एक वैश्विक खेल है और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर इंग्लैंड क्रिकेट को समावेशी बनाना चाहता है, तो सभी खिलाड़ियों को बराबरी का मौका देना जरूरी है। अब द हंड्रेड का ऑक्शन लंदन में आयोजित किया जाएगा, जहां यह साफ हो जाएगा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को टीमों में जगह मिलती है या नहीं। ECB के बयान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें अब ऑक्शन पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि विवाद का अंत होता है या यह मुद्दा आगे भी चर्चा में बना रहेगा।
