बजट सत्र 2026-27 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश विधान सभा में CM योगी आदित्यनाथ का संबोधन

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  • काफी सदस्यों ने इस बजट सत्र में भाग लिया, 169 सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया, सभी को हृदय से धन्यवाद

लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था के रूप में विधायिका अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है, सदन का जो भी एजेंडा था, उसके अनुरूप कार्यवाही चली है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

शिवपाल  का श्राप नेता प्रतिपक्ष पांडेय  को न लगे,ये मैं कामना करता हूँ

मुझे लगता था कि नेता प्रतिपक्ष उम्र के हिसाब से आंकड़ों में घालमेल नही करेंगे, लेकिन लगा कि चच्चू का प्रभाव उनपर आ गया, राजकोषीय घाटे को लेकर वित्तमंत्री जी ने तत्काल बात उनकी बात को सही किया। योगी आदित्यनाथ जो राजकोषीय घाटा है, जो कुल GSDP का उसके बारे में अगर आप देखेंगे तो 2016-17 जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इसका प्रतिशत था 4.39 प्रतिशत और आज के दिन पर 25-26 में हम इस समय 25-26 में हैं, इस समय है यह 2.97 प्रतिशत है ये, यानी उससे काफी कम है, इसका मतलब हमारा वित्तीय प्रबंधन बेहतर है और इस वित्तीय प्रबंधन के लिए ही आज देशभर के बैंकर्स यूपी पे विश्वास करते हैं।

समाजवादी पार्टी सरकार में ऋणग्रस्तता 2016-17 में लगभग 30 फीसदी थी और आज यह 26 फीसदी के आसपास है…

इस वित्तीय वर्ष के अंत तक हम लोगों ने 2026-27 में का वित्तीय वर्ष समाप्त होगा वहाँ तक हम उसको 23 प्रतिशत तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश की जो प्रति व्यक्ति आय थी 2016-17 में लगभग 43,000 के आसपास थी और जब हम लोग इस वित्तीय वर्ष के अंत में यानी 31 मार्च तक जाएंगे तो यह 1,20,000 क्रॉस कर चुकी होगी, क्या 43,000 में और 1,20,000 में कोई अंतर नहीं है…!!!

समाजवादी पार्टी के समय में उत्तर प्रदेश क्या था?

पांडे पुराने समाजवादी हैं और मैंने इसीलिए कहा कि आप स्वस्थ रहें, क्योंकि आप समाजवादी आंदोलन के जो सबसे वरिष्ठ पिलर हैं और अंतिम वह पीढ़ी है जिसने समाजवादी आंदोलन के अनुसार जीवन जीने का प्रयास किया है, जो जेपी चाहते थे, जो लोहिया चाहते थे। आपके पीछे शिवपाल जी जैसे कुछ लठैत भी थे जो उसके अनुसार जीने का प्रयास करते थे, लेकिन आप लोगों ने उसके अनुरूप संघर्ष किया, लेकिन आने वाली पीढ़ी ने प्रदेश का क्या हाल किया? क्या स्थिति थी उत्तर प्रदेश की? और हम इस बात को कहते हैं ,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2016-17 में उत्तर प्रदेश की जो स्थिति थी, उत्तर प्रदेश देश के अंदर सबसे यानी बड़े राज्यों में से है, अगर आप देखें तो बॉटम थ्री राज्यों में आता था, जो सबसे नीचे के राज्यों में उत्तर प्रदेश की गिनती होती थी और बीमारू राज्य उत्तर प्रदेश हो गया था, परसेप्शन खराब था। देश भर में आपको जाने का अवसर प्राप्त होता था तो लोग किस निगाह से देखते थे उत्तर प्रदेश को, आपसे ज्यादा कोई छुपा हुआ नहीं है, लेकिन इन साढ़े 8-नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश के अंदर जो परिवर्तन आया है, बॉटम थ्री से टॉप थ्री राज्यों में उत्तर प्रदेश को पहुँचाने का काम इसी डबल इंजन सरकार ने किया है टॉप थ्री राज्यों में, 13 लाख करोड़ रुपए की उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी को पहुँचा करके हम 36 लाख करोड़ तक पहुँचा रहे हैं और हमने तय किया है कि 26-27 में इसको 40 लाख करोड़ तक पहुँचाएँगे।

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2017 के पहले कोई भी व्यक्ति रहा होगा, कोई भी व्यक्ति रहा होगा तो उत्तर प्रदेश का कोई भी नौजवान था, कोई भी नागरिक था, किसी भी तबके का कोई व्यापारी हो, उद्यमी हो, कोई भी रहा हो, वह देश के अंदर जाता था उसके बारे में अच्छी धारणा नहीं होती थी, लोग शक की निगाहों से देखते थे और आप लोगों ने तो कुछ जनपदों को ऐसा बना दिया था कि उस जनपद के नाम पर लोग होटल में कमरे नहीं देते थे, धर्मशालाओं में रहने की व्यवस्था नहीं करने देते थे, नहीं रहने देते थे, लेकिन आज मैं कह सकता हूँ कि हमारे उत्तर प्रदेश का नागरिक देश के अंदर और दुनिया के अंदर कहीं जाता है तो दुनिया गौरव से चेहरा सामने वाले का चेहरा चमकता है, अच्छा उत्तर प्रदेश से! यह परसेप्शन, यह जो परिवर्तन आया है, यह सरकार की नीतियों के कारण, स्पष्ट नीति और शुद्ध नियत के नाते यह परिवर्तन देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ हम लोग आए थे बजट प्रदेश का खजाना खाली, बैंक कोई पैसा देने को तैयार नहीं, हां, हमने लीकेजेस रोके, भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया और प्रभावी अंकुश लगाने का परिणाम था कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होती हुई दिखाई दी।

भारत मण्डपम में कांग्रेस ने अराजकता फैलाई, शर्मनाक घटना की गई कांग्रेस द्वारा, भारत की छवि खराब करने का प्रयास कांग्रेस द्वारा किया गया । उत्तर प्रदेश में 2016-17 में जो कैपिटल एक्सपेंडिचर था वह 71,000 करोड़ रुपए के आसपास था और आज यह है 1,77,000 करोड़ रुपए से अधिक का। आप अनुमान करें कि सरकार किस रूप में इसको आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है और अगर आप इसको देखेंगे कि ये चीज और ये देश के अंदर सर्वाधिक है,ऐसा नहीं कि इसमें हम कहीं पीछे हों, सबसे ज्यादा देश के अंदर है, सबसे ज्यादा… पहली बार उत्तर प्रदेश ने अपना आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन के अंदर प्रस्तुत किया है और मुझे लगता है आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करने के लिए काफी दिनों से काम चल रहा था, वित्त मंत्री जी कह रहे थे कि हमें करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैंने कहा, असमंजस की स्थिति नहीं होनी चाहिए, अगर हमने काम किया है तो वह आंकड़े आने ही चाहिए सभी के सामने, सबके सामने प्रस्तुत किए जाने चाहिए और ये प्रस्तुत यहां पर पहली बार उत्तर प्रदेश पहला राज्य होगा जिसने आर्थिक सर्वेक्षण सदन के सामने प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब प्रदेश के अंदर टेक्नोलॉजी है, ट्रस्ट है और ट्रांसफॉर्मेशन, ये ट्रिपल टी की त्रिवेणी हमें हर एक स्तर पर देखने को मिलती है,आज हमने इस दिशा में जो प्रयास किए हैं और उसी दिशा में आज प्रदेश सरकार के द्वारा ये प्रयास, ये बजट उसी का परिणाम है और उसी को हम आगे बढ़ाने के क्रम में आज यहां पर आए हैं। एक समय था जब दुनिया के अंदर “ऑयल इकोनॉमी” मानी जाती थी, यानी जिसके पास तेल है अर्थव्यवस्था पर उसका कब्जा है, बाद में जितनी भी अन्य टेक्नोलॉजी आई, जिसको आप आज की इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के रूप में जानते हैं या फिर अलग-अलग समय में आई जिसका एकाधिकार था उन लोगों ने उस पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया। लेकिन आज के समय में जो हमारा मानना है कि और पूरी दुनिया भी इस बात को मानती है कि AI ही ऑयल का स्थान लेने वाला है और किस रूप में लेने जा रहा है इसके बारे में सबसे पहली जो रिक्वायरमेंट उसकी है वो डाटा सेंटर की है, और डाटा सेंटर की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के अंदर ने अपने कई कदम बढ़ाए हैं। हमने उसके लिए डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है, 2017 के पहले उत्तर प्रदेश के अंदर डाटा सेंटर नहीं थे लेकिन हम लोगों ने इसके बाद डाटा सेंटर स्थापित करने की कार्रवाई की है और अब तक हमारे पास कई डाटा सेंटर यूपी के अंदर स्थापित हो चुके हैं।

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आप दलितों की बात कर रहे थे, पिछड़ों की बात कर रहे थे कि हम समाजवादी करते थे, लेकिन आप लोग भूल गए कि चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार थी और हर वर्ष 1200 से 1500 मौत अनुसूचित जाति, अति पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीबों के बच्चों की होती थी केवल इंसेफेलाइटिस और 2017 तक देखने को मिली, ये सारे डाटा हमने एक साथ इकट्ठे करने के लिए टीमें लगाईं, बहुत सारे संगठनों को हमने एक साथ जोड़ा था, बहुत सारे विभाग एक साथ जुड़े थे और फिर हम लोगों ने जब एक साथ फोकस्ड कार्रवाई की, परिणाम क्या है? 2019 के बाद इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन हो गया है, आज इंसेफेलाइटिस की बीमारी नहीं है और हर बच्चा बच गया है। हमने उसको जाति के आधार पर नहीं देखा है, हमने उसको किसी उस आधार पर नहीं देखा है, आप लोगों का नजरिया जाति का हो सकता है, आप लोग जाति के आधार पर सोचते हैं। शासन को भेदभाव नहीं करना चाहिए, कानून की निगाह में शासन की योजनाओं का लाभ समान रूप से सबको मिलना चाहिए और इसीलिए सरकार इस बारे में कहती है कि मूल जानना बड़ा कठिन है।

दिनकर की पंक्तियां मुझे याद आती हैं,

“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का, धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का, पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर और जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर” : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

आप लोग केवल जातीय आधार पर समाज को बांटते रहे, उस दलित के बच्चे के बारे में नहीं सोचते थे जो इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित होकर के दम तोड़ता था,उस अति पिछड़ी जाति के बच्चे के बारे में नहीं सोचते..

डॉक्टर संजय निषाद जी की पीड़ा वैसे ही नहीं थी, उनकी पीड़ा इस बात को रही होगी,

आपकी पीड़ा तो इसलिए थी कि आप लोग ये चाहते थे कि वो आप लोगों का पिछलग्गू बना रहे और मंत्री न बने,

लेकिन आज एक गरीब का बच्चा, अगर एक गरीब का बेटा और गरीब का नेता मंत्री बन गया तो समाजवादियों को बुरा लग गया कि परिवार से कैसे हटकर ये आ गया…

अप्रैल से यूपी में शिक्षामित्रों को ₹18 हजार,अनुदेशक को ₹17 हजार दिए जाएंगे, ₹5 लाख कैशलेस इलाज :  योगी 

आपने कल देखा होगा कि देश के अंदर प्रधानमंत्री  ने जिस AI समिट का उद्घाटन दिल्ली में किया है, वह AI समिट में 20 राष्ट्राध्यक्षों ने अपने संबोधन में जो बातें कही हैं, बहुत महत्वपूर्ण बातें कही हैं और डाटा के AI के बारे में कि AI किस रूप में नई संभावनाओं को आगे क्रिएट कर सकता है, इसमें हमारी क्या भूमिका हो सकती है, लेकिन उसके लिए स्किल मैनपॉवर चाहिए। उस स्किल मैनपॉवर के लिए आज उत्तर प्रदेश सरकार अपने नौजवानों के लिए, क्योंकि हमारा मानना है कि AI गेम चेंजर होने वाला है और इसमें यूपी के युवाओं को, यूपी के स्केल का, क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जिस राज्य ने 56 से 60 फ़ीसदी हमारे पास जो युवा है वह कामकाजी है, जो हमारे पास आबादी है यह कामकाजी है और इसको कार्य चाहिए। उस कामकाजी युवा के लिए AI की भूमिका क्या हो सकती है, खासतौर पर हमारे स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के लिए, हम लोग उनके लिए “AI टूल्स” के “फ्री वर्जन” का उपयोग करने के लिए उनको अब तक पैसे देने की आवश्यकता पड़ेगी और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में 25 लाख उत्तर प्रदेश के नौजवानों को AI वर्जन को फ्री में उपलब्ध करवाने की दिशा में एक बड़ी कार्य योजना के साथ कार्य करेगी।

यह उत्तर प्रदेश के नौजवानों के लिए हम लोग एक नए कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहे हैं…

सिंचाई की क्षमता को बढ़ाया गया, विस्तार किया गया,सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कब से लंबित पड़ी हुई थी,शिवपाल  इसीलिए भाग गए, उनको मालूम था ये नाम आएगा, सिंचाई मंत्री के रूप में उन्होंने क्या काम किया है,कल वो टिप्पणी कर रहे थे स्वतंत्र देव जी पर.. बाणसागर की परियोजना हो, अर्जुन सहायक की हो, या सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना हो, मध्य गंगा की हो, भारत सरकार उसपर कार्य कर चुकी है या कार्य कर रही है। हमने लाखों हेक्टेयर लैंड को सिंचाई की सुविधा भी दी है, लेकिन जो बची जो ऐसे ट्यूबवेल हैं जहाँ किसान आज भी डीजल से अपना पंपिंग सेट चला करके सिंचाई करता है, उन ट्यूबवेल को हम सोलर पैनल देने की व्यवस्था करने जा रहे हैं और उस दिशा में हम लोगों ने 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी इसमें की है।

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