लखनऊ विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आर्थिक प्रगति और प्रशासनिक बदलावों का विस्तृत खाका पेश करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब भरोसे, बदलाव और समयबद्ध सेवाओं का मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह “नया यूपी” है, जहां नीति स्पष्ट है, नीयत मजबूत है और नतीजे जमीन पर दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में इस समय 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जो 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। कृषि के बाद एमएसएमई ही राज्य में सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय यह सेक्टर लगभग ठप स्थिति में था और उद्यमियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ का सामना करना पड़ता था। सरकार ने नई औद्योगिक नीति के तहत एमएसएमई इकाइयों को स्थापना के शुरुआती 1000 दिनों तक कई तरह की एनओसी से छूट दी है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़ी राहत मिली और उद्योग लगाने की प्रक्रिया सरल हुई। मुख्यमंत्री ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन का परिणाम बताया।
उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल परियोजना का उद्घाटन करेंगे। पहले मेरठ से दिल्ली की यात्रा में 3-4 घंटे लगते थे, लेकिन अब आधुनिक कनेक्टिविटी के जरिए यह दूरी लगभग 45 मिनट में तय होगी। इसे विकास की रफ्तार का प्रतीक बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश अब पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर है। 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसियां लागू की गई हैं। ‘निवेश मित्र’ और ‘उद्यमी मित्र’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म निवेशकों को पारदर्शी और सुरक्षित माहौल दे रहे हैं। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश अब अग्रणी राज्यों में शामिल है।
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उन्होंने कहा कि 1947 से 2017 तक जहां लगभग 14 हजार कारखाने स्थापित हुए थे, वहीं पिछले साढ़े आठ वर्षों में यह संख्या 31 हजार से अधिक पहुंच गई है। 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 60 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिला। प्रदेश अब मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का बड़ा केंद्र बन रहा है। देश के 65% मोबाइल फोन और लगभग 60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण यहीं हो रहा है। जल्द ही उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट की आधारशिला रखी जाएगी, जिससे प्रदेश तकनीकी क्रांति का केंद्र बन सकेगा।
