तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Election Results) में Indian National Congress (कांग्रेस) ने जोरदार वापसी की है और राज्य की सियासी तस्वीर बदल दी है। 11 फरवरी को हुए मतदान के बाद 13 फरवरी को वोटों की गिनती के परिणाम सामने आए, जिसमें कांग्रेस ने 116 नगरपालिकाओं में से 83 नगरपालिकाओं और 7 नगर निगमों में से 5 में जीत की तरफ मजबूत बढ़त दर्ज की है।
यह कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि दो साल पहले राज्य में सरकार में वापसी के बाद पार्टी ने अब शहरी निकायों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
मुख्य परिणाम
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कांग्रेस ने मंचरियाल, रामागुंडम और नालगोंडा नगर निगमों में बहुमत हासिल कर लिया है।
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महबूबनगर में 60 सदस्यीय विधानसभा का मुकाबला कड़ा है, जहां कांग्रेस 29 सीटों के साथ BRS से आगे निकलने के करीब है।
BRS को बड़ा झटका
राज्य की सत्ताधारी पार्टी Bharat Rashtra Samithi (BRS) को इन चुनावों में करारा झटका लगा है। पार्टी को कई वार्डों और नगरपालिकाओं में हार का सामना करना पड़ा है, जिससे उसका असरशाली प्रभाव कमजोर दिख रहा है।
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बीजेपी ने दिखाया दम
Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने करीमनगर और निजामाबाद नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया है। यह दोनों नगर निगम BRS के गढ़ रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने वहां शानदार प्रदर्शन किया है और जीत दर्ज की है। भाजपा के लिए यह खास इसलिए भी है क्योंकि उसने 2020 के चुनावों में जीते गए 2,996 वार्डों में अधिकांश सीटें अपने नाम की हैं, जो पार्टी के प्रति जनसमर्थन को दर्शाता है।
चुनाव के नतीजों के बाद यह स्पष्ट होता है कि तेलंगाना के शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने स्तर पर मजबूती दिखाई है, जबकि BRS की पकड़ ढीली होती दिख रही है।
अब 16 फरवरी को नगर निगम अध्यक्षों और महापौरों का चुनाव होना है, जिसमें इन नतीजों का असर और स्पष्ट रूप से दिखेगा।
तेलंगाना Local Body Election Results 2026 ने राज्य की सियासत को एक नया दौर दे दिया है और इसके परिणाम आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिशीलता को और प्रभावित करेंगे।
