चमत्कार नहीं, मन का बदलाव ही असली दर्शन है: प्रेमानंद

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लखनऊ। एक सत्संग संवाद के दौरान श्रद्धालुओं ने महाराज जी से प्रश्न किया कि वे लंबे समय से नाम जप कर रहे हैं, फिर भी उन्हें कोई चमत्कार या दर्शन क्यों नहीं हुआ। इस पर महाराज जी ने बेहद भावपूर्ण उत्तर देते हुए कहा कि सबसे बड़ा चमत्कार यही है कि इतने पापों और विकारों के बीच भी व्यक्ति प्रभु का नाम जप रहा है। महाराज जी ने समझाया कि भक्ति का उद्देश्य चमत्कार देखना नहीं, बल्कि भीतर प्रेम और परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि अगर नाम जप से क्रोध कम हुआ है, मन शांत हुआ है और दूसरों के दुख में करुणा जागी है, तो यही भगवान का सच्चा दर्शन है।

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान कोई जादू का खेल नहीं हैं, बल्कि वे हृदय के शुद्ध भावों में प्रकट होते हैं।

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सत्संग का मुख्य संदेश रहा— “चमत्कार की तलाश छोड़ो, प्रभु के प्रेम में खुद को खो दो।”

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