माघ पूर्णिमा व्रत आज: स्नान-दान से खुलते हैं पुण्य के द्वार, जानिए इस पावन तिथि का धार्मिक महत्व और विधि

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राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 1 फरवरी 2026, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन विशेष रूप से स्नान, दान, व्रत और पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा सहित सभी पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन के समस्त पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में माघ मास को देवमास कहा गया है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर विचरण करते हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी कारण देशभर के तीर्थ स्थलों और नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

माघ पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव मकर राशि में होते हैं और चंद्रमा कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तब माघी पूर्णिमा का विशेष संयोग बनता है। इस शुभ योग में किया गया स्नान-दान कई गुना फल देता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लेख मिलता है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु स्वयं जल में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन किया गया दान न केवल इस जन्म बल्कि पूर्व जन्मों के पापों का भी नाश करता है।

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माघ पूर्णिमा पर किन देवताओं की होती है पूजा

इस दिन प्रातःकाल पवित्र नदी में स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद देवी-देवताओं की पूजा, दान-पुण्य और विशेष रूप से चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। माघ पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करते हैं, जिससे घर में सुख-शांति, धन-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज

माघ पूर्णिमा के व्रत में सात्विक आहार का विशेष ध्यान रखा जाता है। भक्तजन दिनभर जल, फल और दूध का सेवन करते हैं। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करते हैं। इस दिन चाय, कॉफी, अनाज, नमक, मसाले और तले-भुने भोजन से परहेज करने की परंपरा है, ताकि शरीर और मन दोनों शुद्ध रहें। माघ पूर्णिमा न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जन का भी विशेष अवसर माना जाता है। श्रद्धा भाव से किया गया स्नान, दान और पूजा जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

 

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