प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मंगलवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब सेक्टर-5 स्थित नारायण शुक्ला धाम शिविर में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें और काला धुआं करीब 5 किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। घटना के बाद मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और शिविर में रह रहे कल्पवासी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नारायण शुक्ला धाम शिविर में कुल 15 टेंट और करीब 20 दुकानें लगी हुई थीं। आग ने देखते ही देखते पूरे शिविर को अपनी चपेट में ले लिया। शिविर में रह रहे 50 से अधिक कल्पवासी समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत या झुलसने की सूचना नहीं है।
आग लगने से मची भगदड़
जैसे ही आग की लपटें उठती दिखीं, आसपास के श्रद्धालुओं और कल्पवासियों में भगदड़ मच गई। लोग अपने जरूरी सामान तक नहीं निकाल पाए और केवल जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ पड़े। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरे शिविर को चपेट में ले लिया।
जाति और समर्थन से कुर्सी मिल सकती है, अनुभव के बिना विकास नहीं
घटना की सूचना मिलते ही मेला प्रशासन और दमकल विभाग हरकत में आया। मौके पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां पहुंचीं, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझाने में दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि आग लकड़ी, कपड़े और प्लास्टिक के सामान में तेजी से फैल रही थी।
प्रशासन की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने आसपास के अन्य शिविरों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा शुरू कर दी है।
एक भी टेंट नहीं बचा
आग इतनी तेज थी कि नारायण शुक्ला धाम शिविर में एक भी टेंट सुरक्षित नहीं बचा। कल्पवासियों के कपड़े, बिस्तर, राशन और पूजा-सामग्री पूरी तरह जलकर राख हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी संत सतुआ बाबा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से पूरी घटना की जानकारी ली और कल्पवासियों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
