बड़कली गांव की दो साल की नन्ही नायरा की मौत ने हर किसी को अंदर तक हिला दिया है। मासूम के पास न कोई सहारा था, न कोई मदद—और वह जलती आग के बीच अकेली रह गई। यह त्रासदी केवल आग से नहीं, बल्कि उन लापरवाह पलों से उपजी जो परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गए।
बुधवार की रात रजनीश, उसकी पत्नी रानी और दोनों बेटे गांव की एक शादी में शामिल होने गए थे। नायरा सो रही थी, और बिजली न होने के कारण उसके पास एक मोमबत्ती जलाई गई थी। किसे पता था कि वही मोमबत्ती उसकी जान की दुश्मन बन जाएगी। संभवतः मोमबत्ती गिरकर सामान में आग लगा बैठी और कुछ ही मिनटों में नायरा का बिस्तर आग की लपटों में घिर गया।
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करीब दो घंटे बाद लौटे परिजनों ने कमरे से उठता धुआं देखा तो उनका कलेजा कांप उठा। अंदर जाकर उन्होंने चीखते-रोते आग बुझाने की कोशिश की, पर तब तक सब खत्म हो चुका था। नन्ही नायरा की जिंदगी चंद लपटों ने निगल ली थी।
गांव के लोग भी इस हादसे से सदमे में हैं। हर आंख नम है, हर दिल में एक ही सवाल—क्या इतनी छोटी-सी लापरवाही से एक मासूम की जान नहीं चली जानी चाहिए थी? गुरुवार को परिवार ने बिना पुलिस को सूचना दिए बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस का कहना है कि घटना की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।
