
पश्चिम बंगाल में 11 राज्यों के मुकाबले SIR की प्रक्रिया को लेकर रोज नई खबरें और विरोध देखने को मिल रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह शांतिपूर्वक चल रही है। BLO को एक तरफ भड़काया जा रहा है तो दूसरी तरफ उनके ऊपर तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी जबरन लोगों के नाम जोड़ने का दबाव डाल रहे हैं। इसी स्थिति से हैरान–परेशान BLO ने आज कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया, जिसमें राजनीतिक तनाव गहरा रहा है। इस विरोध के पीछे काफी हद तक राजनीति है, जिसमें ममता बनर्जी की प्रमुख भूमिका सामने आ रही है।
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दरअसल, ममता बनर्जी ने SIR को साइलेंट इनविजिबल रिगिंग यानी शांत और अदृश्य धांधली करार देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बंगाल में SIR को लागू नहीं होने देने की कठोर चेतावनी भी दी है और अपने विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व खुद कर रही हैं। ममता बनर्जी की अपील को लेकर टीएमसी ने इसे बंगाली अस्मिता और संविधान की रक्षा के संघर्ष के रूप में पेश किया है। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता विरोध मार्चों में शामिल होते हैं, जो लोकतंत्र बचाओ और बंगाल का वोट बंगाल का हक जैसे नारे लगाते हैं। उधर, बंग्लादेशी घुसपैठिये देश छोड़कर भाग रहे हैं। इस सबके बीच ममता बनर्जी ने भाजपा पर लोगों के मताधिकार छीनने का आरोप भी लगाया है।
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BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर के विरोध प्रदर्शन के बारे में राजनीतिक दलों में आरोप–प्रत्यारोप का दौर चला है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी की सरकार मतदाता सूची के डेटा में हेरफेर कर रही है और BLO को दबाव में रखा जा रहा है। वहीं ममता बनर्जी BLO के साथ जमीन पर हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे किसी फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं करतीं। इस बीच, कुछ जगहों से BLO के आत्महत्या की खबरें भी आई हैं, जिनके पीछे भी राजनीतिक तनाव को कहा जा रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन इस विवाद को एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना चुका है, जहां वे चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं और इसे बंगाल तथा बंगालियों के वोट अधिकार के खिलाफ मानती हैं। उन्होंने SIR को एनआरसी से जोड़कर भी इसका विरोध किया है।
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ऐसे माहौल में विरोध प्रदर्शन के दौरान वे जनता को सक्रिय करती दिख रही हैं, जिससे यह साफ है कि वे SIR के खिलाफ जनता में नाराजगी भड़काने में भूमिका निभा रही हैं। इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भूमिका, BLO के विरोध प्रदर्शन, और ममता बनर्जी के तेवर राजनीतिक और वास्तविकता दोनों का मिश्रण हैं। जहां एक ओर प्रक्रिया की तर्कसंगत समीक्षा जरूरी है, वहीं राजनीतिक विरोध इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा भी बना रहा है, खासकर पश्चिम बंगाल में जहां ममता बनर्जी इस मुद्दे को अपने राजनीतिक एजेंडा का केंद्र बना चुकी हैं।
