बस्ती में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई: वन विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

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आशीष द्विवेदी

बस्ती । उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच हरे-भरे पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सदर वन रेंज के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ईटहर गांव में हरे आम के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला सामने आया है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हरे पेड़ों को सूखा बताकर फर्जी परमिट जारी किए जा रहे हैं, और यह धंधा जोरों पर चल रहा है। यह घटना सरकार की ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी हरियाली मुहिम को झूठा साबित कर रही है।

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ईटहर गांव के खेतों और बागों में पिछले कुछ दिनों से कुल्हाड़ियों और आरी की आवाज गूंज रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ठेकेदारों ने रात के अंधेरे में दर्जनों हरे आम के पेड़ काट डाले, जिनकी लकड़ी ट्रैक्टरों पर लादकर बाहर ले जाई जा रही है। एक ग्रामीण ने बताया, “ये पेड़ तो फल देने वाले हैं, सूखे कैसे हो गए? वन विभाग के लोग आते ही नहीं, लेकिन कटाई की सूचना मिलने पर भी चुप्पी साध लेते हैं।” पुलिस और वन विभाग पर भी संलिप्तता के आरोप लग रहे हैं, क्योंकि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। एक वृद्ध किसान बोले, “ये पेड़ हमारी सदी का सहारा हैं, इन्हें काटने से गांव की हरियाली मर जाएगी।

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प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कटाई के लिए जारी परमिटों में हरे पेड़ों को जानबूझकर सूखा दिखाया गया है। वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कुछ भ्रष्ट तत्वों की साजिश है, लेकिन उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।” स्थानीय लोग फर्जी परमिटों की जांच की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कटाई से मिट्टी का कटाव बढ़ेगा, जल स्तर गिरेगा और जैव विविधता नष्ट हो जाएगी। बस्ती में पहले भी हर्रैया क्षेत्र के बरगदवामाफी गांव में नीम-जामुन के पेड़ काटे जाने का मामला उजागर हो चुका है, जहां वन विभाग ने मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन दोषियों को सजा नहीं मिली।
यह सिलसिला तब तक नहीं रुकेगा, जब तक विभागीय जिम्मेदारों पर सख्ती नहीं होगी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत की है और चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई न हुई तो आंदोलन छेड़ देंगे। पर्यावरण प्रेमी संगठनों ने भी हस्तक्षेप की मांग की है। बस्ती प्रशासन ने जांच टीम गठित करने का आश्वासन दिया है, लेकिन जमीन पर अमल कब होगा, यह सवाल बरकरार है।

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