- चीनी मिल संघ के सेवानिवृत प्रधान प्रबंधक तकनीकी के अजब गजब कारनामें
- घटिया जूस पम्प और अन्य सामानों की आपूर्ति कराकर किया करोड़ों का गोलमाल
- सजातीय मेरठ की ब्लैक लिस्ट फर्म को आपूर्ति का दिया था ठेका
- ACS गन्ना ने संविदा पर फिर से करने वाले को बनाया प्रधान प्रबंधक तकनीकी
राकेश यादव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में अपर मुख्य सचिव की अनुमति के बाद संविदा पर प्रधान प्रबंधक तकनीकी के घोटालों के आए दिन नए नए मामले प्रकाश में आ रहे है। संविदा पर नियुक्त प्रधान प्रबंधक ने अपने कार्यकाल में एक ऐसी फर्म को जूस पंप की सप्लाई दे दी जिसको संघ ने ब्लैक लिस्ट में डाल रखा था। इसको पहले ब्लैक लिस्ट से हटाया और बाद में उसको जूस पंप की आपूर्ति देकर लाखों रुपए का गोलमाल किया। स्वजातीय बंधु की फर्म को दिए गए इस फर्म के घटिया जूस पंप की आपूर्ति सहकारी चीनी मिल के अलावा अन्य किसी चीनी मिल को नहीं की जा रही है। संघ की केंद्रीय क्रय के तहत की गई इस घटिया पंप की आपूर्ति का यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना रहा। चर्चा है कि केंद्रीय क्रय के तहत मशीनरी के सामानों की खरीद फरोख्त में करोड़ों रुपए का गोलमाल किया गया है। केंद्रीय क्रय की पत्रावली में इस घोटाले के सभी साक्ष्य उपलब्ध है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई गई तो करोड़ों का घोटाला उजागर हो जाएगा।
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मिली जानकारी के मुताबिक बीते सप्ताह चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी मीना की अनुमति के बाद सेवानिवृत प्रधान प्रबंधक तकनीकी विनोद कुमार अग्रवाल की संविदा पर प्रधान प्रबंधक तकनीकी नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के बाद से संघ के अधिकारियों और कर्मियों में खलबली मची हुई है। चर्चा है कि संघ में केंद्रीय क्रय के तहत करोड़ों रुपए का घोटाला करने वाले प्रधान प्रबंधक तकनीकी की पुनः नियुक्ति ने विभाग के आला अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अफसरों ने घोटाला की जांच कराए जाने के बजाए इस सेवानिवृत अधिकारी को लूट का मौका जरूर दे दिया है।
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सूत्रों का कहना है कि चीनी मिल संघ में प्रधान प्रबंधक तकनीकी/ क्रय का केंद्रीय क्रय के अन्तर्गत मशीनरी सामानों की खरीद फरोख्त में करोड़ों का घोटाला किया है। संघ मुख्यालय ने जिस फर्म को ब्लैक लिस्ट किया था उसे वर्ष 2013 में कई सहकारी चीनी मिलों में खराब गुणवत्ता के जूस पंपों की सप्लाई का आर्डर दिया था। उन्होंने वर्ष 2018 में प्रधान प्रबंधक तकनीकी/क्रय का प्रभार संभालते ही पार्टी से सांठगांठ करके मेरठ की पार्टी अम्बा प्रसाद जैन को काली सूची से निकालकर पुनः जूस पंपों की दर संविदा जारी कर दी थी। अम्बा प्रसाद जैन और विनोद कुमार अग्रवाल के सजातीय होने के साथ साथ दोनों मेरठ से ही ताल्लुक़ रखते है। चीनी मिल संघ की केंद्रीय क्रय की संबंधित पत्रावली में घोटाले के सभी साक्ष्य उपलब्ध है।
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सूत्र बताते है कि इस पम्प की पार्टी अम्बा प्रसाद जैन के पम्प केवल सहकारी चीनी मिलों में ही उपयोग किये जाते है निजी क्षेत्र की कोई भी चीनी मिल नहीं उपयोग करती है। संघ की जारी संविदा दर में किर्लोस्कर मेक एवं पम्प की अन्य प्रतिष्ठित पार्टी की तुलना में अम्बा प्रसाद जैन को भी उसकी बनाई गई प्राइस लिस्ट पर डिस्काउंट दिखाकर संविदा दर जारी कर हर साल लाखो रुपए के अम्बा मेक के ही जूस पम्प खरीदे गए हैं। प्रधान प्रबंधक को मोटा कमिशन देकर मेरठ की फर्म ने लाखों रुपए का गोलमाल किया। सूत्र बताते है कि यही नहीं सेंट्रीफ्यूगल पम्प की तरह ही केंद्रीय क्रय प्रणाली के तहत सहकारी मिलों के लिए खरीदे जाने वाले सामानों जैसे वेल्डिंग इलेक्ट्रोड्स, बॉल एंड रोलर बियरिंग्स इत्यादि की संविदा दर संविदा में प्रधान प्रबंधक ने सीवीसी की गाइडलाइंस का किया खुला उल्लंघन किया। इसके साथ ही प्रमुख आइटम में एल-1 के साथ साथ पार्टी से सांठगांठ करके मोटा कमिशन लेकर एल-2, एक-3 एल 4 सहित सभी पार्टियों को उनकी मनचाही प्राइस लिस्ट पर डिस्काउंट देकर आठ सालों में करोड़ों का घोटाला किया है। उधर इस संबंध में जब अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी मीणा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
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रिटायर मुख्य लेखाधिकारी के भरोसे चल रहा चीनी मिल संघ
उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में सेवानिवृत अधिकारियों का बोलबाला है। विभाग के आला अफसरों ने रिटायर अफसरों को वित्तीय समेत अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रखी है। इनके सेवानिवृत कार्यकाल के दौरान हुए गोलमाल का कौन जिम्मेदार होगा इस सवाल का अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है। सूत्र बताते है करीब पांच साल पहले मुख्य लेखाकार पद से सेवानिवृत हुए सतेंद्र श्रीवास्तव के पास आज भी संघ के पूरे लेखा का प्रभार है। लेखा विभाग से चीनी मिलों के लिए धनराशि का आवंटन किया जाता है। इस आवंटन में खासा कमिशन का खेल चल रहा है। संघ के अधिकारियों ने लेखा विभाग में रिटायर मुख्य लेखाधिकारी की मनमानी की कई बार शिकायत भी की लेकिन स्थित आज भी जस की तस बनी हुई है।
