- कुछ दिनों तक झोंकी ताकत फिर भी नहीं मिले हत्यारे
- साल-दो साल कातिलों को ढूंढने के बाद थक गई हाईटेक पुलिस
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। वैसे तो लखनऊ पुलिस खुद को बहादुर और ताकतवर समझने का दावा अक्सर ठोंकती रहती है, यहां हुई कई सनसनीखेज घटनाओं की फाइलें आज भी पुलिस की फाइलों में गोते लगा रही हैं। बीते कुछ सालों पहले हुई वारदातों का तिलिस्म तोड़ने के लिए पुलिस ने गहन विवेचना का दावा तो किया, लेकिन साल-दो साल बीतते ही पुलिस हार मान ली और पूरी कवायदें फाइलों में दफन होकर रह गईं।
लखनऊ पुलिस की बहादुरी पर एक नजर
वारदात – 13 अगस्त 2007- डंडइया बाजार में श्रीनाथ ज्वैलर्स के यहां बदमाश गार्ड व सेल्समैन की हत्या कर लाखों के गहने लूट ले गए थे। इतने साल गुजरने के बाद भी ये वारदात पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। जानकार सूत्र बताते हैं कि अपराध में लिप्त एक पुलिसकर्मी के बेटे का इस घटना में नाम सामने आया था, लेकिन एक तत्कालीन उच्चाधिकारी के दबाव के चलते अलीगंज की तत्कालीन पुलिस उसे पूछताछ के लिए हिरासत में नहीं ले पाई। नतीजतन आज तक इस सनसनीखेज मामले का राजफाश नहीं हो सका।
वारदात – बीस दिसंबर 2009 : तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के ओएसडी के गनर दीवान रामलाल की बाइक सवार बदमाशों ने हत्या कर सरकारी कार्बाइन लूट ली थी। इस मामले में पुलिस ने परिजनों पर दबाव बनाकर घटना को रंजिश का रूप देते हुए रामलाल के गांव आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र स्थित अतः डीह निवासी शिव गोविंद सिंह, कतवारू सिंह, राजीव सिंह और देवेन्द्र सिंह को नामजद कर गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कोई बरामदगी नहीं हो पाई। पुलिस ने लूटी गई सरकारी कार्बाइन आज तक नहीं तलाश सकी।
वारदात एक दिसंबर 2017 : गोमतीनगर क्षेत्र के ग्वारी गांव के पास बनारस निवासी मुन्ना बजरंगी के करीबी माने जाने वाले तारिक को बदमाशों ने गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना का खुलासा करने के लिए पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन आज तक हत्यारे हाथ नहीं आ सके।
घटना चार दिसंबर 2015 : मड़ियांव में आईआईएम रोड पर एक किलोमीटर के दायरे में तीन जगहों पर चार पैर व महिलाओं के दो धड़ मिले थे। डबल मर्डर की खबर मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मातहतों को इस घटना का खुलासा करने के निर्देश दिए। पुलिस कुछ दिनों तक ताकत के साथ हाथ-पैर मारी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही हार मान ली और पूरी कवायदें फाइलों में दफन कर चुपचाप बैठ गई, नतीजतन आज तक न तो शवों की शिनाख्त हो सकी और न ही कातिल हाथ लग सके।
वारदात पांच मार्च 2016 : विकासनगर सेक्टर तीन में असलहों से लैस बेखौफ बदमाशों ने बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह और उसके मित्र संजय मिश्र की गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। इस मामले में भी कातिलों की गर्दन दबोचने के लिए विकासनगर पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन आज तक हत्यारे हाथ नहीं लग सके।
इसी दिन गोमतीनगर के के मिठाई वाला चौराहे पर इंदिरा नगर निवासी रितेश अवस्थी के सीने में गोलियों की बौछार कर बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना के मामले में पुलिस पुरानी रंजिश सहित कई बिंदुओं पर पड़ताल करने का दावा की, लेकिन कातिलों का कुछ सुराग नहीं लगा।
घटना 27 फरवरी 2015 : हसनगंज क्षेत्र के चरही बाजार स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर मशीन में रुपए भरने गए एक कस्टोडियन सहित तीन लोगों को बदमाशों ने लूटपाट का विरोध करने पर मौत की नींद सुला दिया था। इस तिहरे हत्याकांड की भी गुत्थी पुलिस आज तक नहीं सुलझा पाई। यह तो महज बानगी भर है और भी कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जिनका राजफाश पुलिस आज तक नहीं कर सकी है। वैसे तो पुलिस खुद को बहादुर और ताकतवर होने का दावा करती फिरती है, लेकिन खबर में दर्शाई गई ये घटनाएं पुलिस की लापरवाही का सुबूत है।
