कारागार की वसूली से तय होता परिक्षेत्र DIG का लिफाफा!

आईजी
  • आगरा परिक्षेत्र DIG  लिफाफे में हुई तीन से चार गुना की वृद्धि
  • परिक्षेत्र की जेलों पर थम नहीं रहा घटनाओं और वसूली का सिलसिला
  • वसूली को लेकर जिला जेल आगरा, कासगंज समेत कई जेल सुर्खियों में,

लखनऊ। कारागार विभाग में जेल परिक्षेत्र के DIG के अजब गजब कारनामे सामने आ रहे है। विभाग में जेल परिक्षेत्र में तैनात डीआईजी ने जेल की वसूली के हिसाब से लिफाफों की कीमत तय कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि दो से तीन गुना अधिक लगान वसूलने के बाद भी डीआईजी अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन नहीं करते है। आगरा जेल परिक्षेत्र के डीआईजी ने प्रभार संभालने के बाद आज तक कई जेल का निरीक्षण तक नहीं किया है। डीआईजी की इस हीलाहवाली से जिला जेल आगरा, कासगंज समेत कई जेल पिछले के पखवारे से सुर्खियों में बनी हुई हैं। जेलों में लूट की इन घटनाओं ने परिक्षेत्र के डीआईजी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। उधर विभागीय मंत्री और अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के मुताबिक जेल मैनुअल में विभाग के अधिकारियों के दायित्वों का विस्तृत विवरण दिया गया। इसको लेकर समय समय पर शासन की ओर से निर्देश भी जारी किए जाते है। सूत्रों का कहना है कि मैनुअल और शासन के जारी निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है जेल परिक्षेत्र डीआईजी परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक जेल का दो-तीन माह के अंतराल में विधिवत निरीक्षण कर रिपोर्ट विभागाध्यक्ष को भेजेंगे। इसके साथ ही रात्रि भ्रमण भी करेंगे। यह निर्देश और व्यवस्थाएं सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गई हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रत्येक दो तीन माह के अंतराल के दौरान होने वाले निरीक्षण में परिक्षेत्र डीआईजी की जिम्मेदारी होती है कि वह बंदियों को वितरित होने वाले नाश्ते, दोपहर और शाम को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की पड़ताल करे। इसके साथ ही बंदियों को मिलने वाली रोटी, सब्जी, दाल चावल इत्यादि का वजन कराए और यदि बंदियों को निर्धारित वजन से कम भोजन दिया जा रहा हो तो प्रभारी जेल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करे। इसके इसके अलावा विविध वस्तुओं (MSK) के तहत की गई खरीद फरोख्त के दामों की पड़ताल करने के साथ जेल में संचालित की जा रही कैंटीन में बिक रही खाद्य सामग्री के लिए खरीदी गई वस्तुओं के दामों की गहन पड़ताल कर इसकी रिपोर्ट विभागाध्यक्ष को पेश करे।

सूत्रों का कहना है बंदियों के राशन में हो रही बेतहाशा कटौती, कैंटीन और एम एस के तहत मनमाने दामों पर हो रही खरीद फरोख्त को छिपाने के एवज में जेलों की ओर से परिक्षेत्र के डीआईजी को तोहफे के रूप में लिफाफा भेंट किया जाता है। सूत्र बाते है कि आगरा परिक्षेत्र के डीआईजी ने जेलों की वसूली को देखकर लिफाफों की धनराशि तय कर रखी है। वसूली की लगान तीन से चार गुनी बढ़ोत्तरी कर उन्होंने जेलों का निरीक्षण करना ही बंद कर दिया। जिला जेल आगरा, कासगंज समेत कई जेल इसका जीता जागता उदाहरण बन गई है। इन जेलों में वसूली का काम धड़ल्ले से चल रहा है। घटनाएं होने पर छोटे कर्मियों को निपटाकर बड़े अधिकारियों को बचा लिया जाता है। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

एक अधिकारी दो-दो जिम्मेदारी तो कैसे होगी जेलों की निगरानी

वर्तमान समय में प्रदेश के कारागार विभाग में चार आईपीएस और तीन विभागीय DIG  तैनात है। विभागीय DIG  में प्रेमनाथ पांडे को लखनऊ कारागार मुख्यालय DIG के साथ आगरा जेल परिक्षेत्र का प्रभार सौंपा गया है। DIG  डॉ रामधनी को लखनऊ परिक्षेत्र और DIG  शैलेन्द्र मैत्रेय को अयोध्या जेल परिक्षेत्र के साथ गोरखपुर परिक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। IPS, DIG में सुभाष शाक्य को मुख्यालय के साथ मेरठ जेल परिक्षेत्र का प्रभार दिया है। DIG राजेश श्रीवास्तव के पास पुलिस विभाग के साथ प्रयागराज और वाराणसी जेल परिक्षेत्र का प्रभार है। पुलिस DIG कुंतल किशोर को बरेली परिक्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। IPS  प्रदीप गुप्ता को कानपुर परिक्षेत्र का प्रभार दिया गया है। उधर विभाग के आला अफसरों ने इसे शासन का मामला बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

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