सुशीला कार्की होगी नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री, आज ही लेंगी शपथ, प्रतिनिधि सभा होगी भंग

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उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू। पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को आज शाम अंतरिम सरकार की प्रमुख नियुक्त किए जाने पर सहमति बन गई है। शुक्रवार को दिनभर चले गहन राजनीतिक विमर्श के बाद प्रतिनिधि सभा को भंग करने और कार्की को सरकार की कमान सौंपने की सहमति बनी। शीतल निवास से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, राष्ट्रपति रामचंद्र पौड़ेल शुरू में यह शर्त रख रहे थे कि पहले कार्की को सरकार का नेतृत्व सौंपा जाए, उसके बाद ही प्रतिनिधि सभा भंग की जाए। हालांकि, आंदोलित युवाओं द्वारा शीतल निवास घेरने की चेतावनी और तेजी से बढ़ते जनदबाव के कारण राष्ट्रपति ने अपना रुख बदलते हुए प्रमुख दलों के शीर्ष नेताओं को सूचित किया कि वे प्रतिनिधि सभा भंग करने जा रहे हैं और उसी के तुरंत बाद कार्की को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल शीतल निवास में प्रतिनिधि सभा भंग करने का प्रस्ताव, कार्की को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का पत्र और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। राजनीतिक दलों ने पहले सुझाव दिया था कि मौजूदा संसद के ढांचे के भीतर ही कार्की को सरकार का नेतृत्व सौंपा जाए, लेकिन कार्की ने स्पष्ट किया कि वे वर्तमान संसद को बरकरार रखते हुए सरकार का नेतृत्व स्वीकार नहीं करेंगी। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने भी स्पष्ट किया था कि न्यूनतम शर्त संसद भंग करना है।

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गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह तक राष्ट्रपति कार्यालय में हुई वार्ताएं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकीं। दिनभर सहमति के संकेत नहीं मिलने पर नेपाल के प्रधानसेनापति अशोकराज सिग्देल ने आपातकाल लागू करने की संभावना का संकेत दिया। उन्होंने शाम तक सरकार न बनने की स्थिति में आपातकाल की आवश्यकता जताई और इस विषय पर सुशीला कार्की को भी जानकारी दी। हालांकि, राजनीतिक दलों के शीर्ष स्तर पर कुछ सहमति बनने लगी, जबकि द्वितीय स्तर के नेताओं ने आपातकाल के विरोध में सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी। अंततः जेनजी आंदोलन के नेतृत्व की मांग के अनुरूप सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार बनाने पर सहमति बनी। बुधवार को नेपाली सेना के जंगी अड्डा में हुई बैठक में जेनजी प्रतिनिधियों ने कार्की का नाम अंतरिम सरकार प्रमुख के रूप में प्रस्तावित किया था। प्रधानसेनापति सिग्देल ने यह प्रस्ताव राष्ट्रपति तक पहुंचाया, जिसके बाद गुरुवार देर शाम से राष्ट्रपति ने दलों के साथ गहन परामर्श शुरू किया।

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परामर्श के दौरान नेपाली कांग्रेस, नेकपा (एमाले), और माओवादी केंद्र के नेताओं ने जेनजी आंदोलन के जनादेश के अनुसार सुशीला कार्की को सरकार प्रमुख बनाए जाने पर सहमति जताई, लेकिन यह शर्त रखी कि यह सब संविधान और संसद की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। गुरुवार रात माओवादी अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल ‘प्रचण्ड’ राष्ट्रपति के निमंत्रण पर शीतल निवास पहुंचे। उनके साथ पार्टी के उपमहासचिव वर्षमान पुन भी मौजूद थे। इसके बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष पूर्णबहादुर खड्का और महासचिव द्वय गगन थापा व विश्वप्रकाश शर्मा को भी बुलाया गया। रात 11 बजे उन्हें फोन कर पार्टी की राय पूछी गई। दलों ने एकमत से कहा कि वे जेनजी आंदोलन की भावना के अनुरूप नई सरकार के गठन में सहयोग को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए संसद को बिना भंग किए ही समाधान खोजने की आवश्यकता है। इसी बिंदु पर मतभेद के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया में देरी हुई। लेकिन अंततः तीव्र जनदबाव और सेना के हस्तक्षेप की चेतावनी के बीच सहमति बनी कि सुशीला कार्की को आज ही प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी और प्रतिनिधि सभा को भंग किया जाएगा।

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