- महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी को पढ़ाने आईं और यहीं की होकर रह गईं
हेमंत कश्यप
जगदलपुर। वर्ष 1927 के आसपास की बात है। बस्तर रियासत की राजकुमारी प्रफुल्ल कुमारी देवी की शादी तय हो चुकी थी इसलिए उन्हें पढ़ाने वाली शिक्षिका की नौकरी छूट रही थी। राजकुमारी ने गुरू से पूछा कि अब आप क्या करेंगी? शिक्षिका ने कहा वह बस्तर की बेटियों के लिए अलग से स्कूल शुरू करना चाहती हैं। राजकुमारी ने तुरन्त गुरू की आज्ञानुसार ब्राम्हणपारा में कन्या शाला शुरू करवा दिया। इस तरह बी. माधवम्मा नायडू बस्तर की प्रथम महिला शिक्षिका बनीं। वह स्कूल अब भी पंचपथ चौंक के पास है और पुतरी शाला के नाम से चर्चित है।
बस्तर की महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी को अक्षर ज्ञान, बारहखड़ी का सीखाने कराने वाली बस्तर रियासत की प्रथम महिला शिक्षिका श्रीमती बी. माधवम्मा नायडू दक्षिण भारतीय महिला थीं। उन्हें अंग्रेजी के साथ हिन्दी और उर्दू का बेहतर ज्ञान था, किंतु उनका नाम न किसी अभिलेख में है न उक्त शाला में, फिर भी उन्हें बस्तर की प्रथम महिला शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त है। बस्तर के पुराने संभान्त घरानों में उनका नाम आज भी इज्जत के साथ लिया जाता है। जगदलपुर वासी उन्हें मास्टरिन अम्मा कहते थे।
जमींदारों के बच्चों को पढ़ाई
1894 में माधवम्मा नायडू अपने बड़े भाई मुनिस्वामी नायडू, व भाभी महालक्ष्मी अम्मा के साथ चांदा, अहेरी होते हुए बस्तर के परलकोट जमींदारी से बस्तर आईं। जमींदारों के बच्चों को पढ़ाते हुए वह भोपालटपनम आईं और यहां से जगदलपुर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी को पढ़ाने आईं तो यहीं की होकर रह गईं। वर्ष 1916 का समय था। जब वह पढ़ाने जाने लगीं।
गुरु आज्ञा का हुआ पालन
महारानी उन्हें गुरुजी कहती थीं। अपने विवाह के पहले उन्होने गुरू से पूछा कि गुरूजी अब आप क्या करोगे? उन्होने महिला शिक्षा पर जोर देते हुए कन्या शाला चलाने की बात कही, तुरन्त गुरू की आज्ञानुसार ब्राम्हणपारा में कन्या शाला बनी और प्रथम महिला शिक्षिका बस्तर की माधवम्मा नायडू बनीं।
