मुख्यालय और शासन में जंग का खामियाजा भुगत रहे अफसर! नियमानुसार मुलाकात कराने पर हटाए गए जेलर, डिप्टी जेलर

  • तबादलों में वसूली करने वाले बाबुओं पर नही हुई कोई कार्यवाही
  • आईजी जेल के किए गए तबादलों की हो रही सराहना

राकेश यादव, विशेष संवाददाता

लखनऊ। स्थानांतरण सत्र के दौरान हुए बेतरतीब तबादलों को लेकर कारागार मुख्यालय और शासन के बीच छिड़ी जंग का खामियाजा अफसरों को भुगतना पड़ रहा है। गाजियाबाद जेल में एक बंदी की मुलाकात को लेकर को जेलर और डिप्टी जेलर पर गिरी गाज को इसी नजर से देखा जा रहा है। नियमों के तहत कराई गई मुलाकात को लेकर की गई इस बड़ी कार्यवाही को लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि शासन में सेटिंग गेटिंग कर कमाऊ जेलों पर पहुंचना मुख्यालय के अफसरों को रास नहीं आ रहा है।

स्थानांतरण सत्र के दौरान कारागार विभाग में DIG, वरिष्ठ अधीक्षक, अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर, हेड वार्डर और वार्डर के बड़ी संख्या में तबादले किए गए। DIG, वरिष्ठ अधीक्षक, अधीक्षक के तबादले शासन से किए गए। वहीं जेलर, डिप्टी जेलर, हेड वार्डर और वार्डर के तबादले मुख्यालय स्तर पर किए गए। इस संवर्ग के तबादलों में जहां एक ओर मुख्यालय के मुखिया ने दिव्यांग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित, पति पत्नी और निजी समस्याओं से जूझ रहे कर्मियों को बुला बुलाकर मनमाफिक स्थानों पर तैनात करके एक मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर मुख्यालय के बाबुओं ने निजी अनुरोध के नाम पर वार्डर संवर्ग के कर्मियों का जमकर दोहन और शोषण किया।

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सूत्रों का कहना है कि इसी प्रकार शासन ने DIG, वरिष्ठ अधीक्षक और अधीक्षक संवर्ग के तबादलों में जमकर पक्षपात किया। दो प्रोन्नति डीआईजी में एक को लखनऊ और दूसरे को आगरा और कानपुर दो परिक्षेत्र का प्रभार सौंप दिया गया। एक विभागीय डीआईजी को एक परिक्षेत्र की जिम्मेदारी तो एक को कोई परिक्षेत्र दिया ही नहीं गया। ऐसा तब किया गया है जब एक एक आईपीएस डीआईजी जेल को दो दो परिक्षेत्र का प्रभार सौंपा गया है। सूत्रों की मानें तो इसी प्रकार अधीक्षक संवर्ग में वरिष्ठ अधीक्षक को अधीक्षक की जेल पर और अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक की जेल पर तैनात कर दिया गया। यह बेतरतीब तबादले शासन ने अधिकारियों से सेटिंग गेटिंग कर किए गए।

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सूत्रों का कहना है कि शासन के यह स्थानांतरण कारागार मुख्यालय के मुखिया को रास नहीं आए। शासन के अधिकारियों को सबक सिखाने के लिए मौका मिलते ही गाजियाबाद के जेलर और डिप्टी जेलर को निपटा दिया। सूत्र बताते हैं कि एक न्यायिक अधिकारी की सिफारिश पर जेल अधिकारी ने एक बंदी की नियमानुसार मुलाकात करा दी। इस मुलाकात को जेल में तैनात एक हेड वार्डर ने इतना तूल दे दिया कि पहले से तबादलों से खफा मुख्यालय के मुखिया को दो अधिकारियों को हटाना पड़ गया। विभाग में चर्चा है कि यह तो सिर्फ बानगी है। तबादलों को लेकर अभी कई और अधिकारियों पर गाज गिरने से इंकार नहीं किया जा सकता है। उधर इस संबंध में प्रमुख सचिव/महानिदेशक कारागार राजेश कुमार सिंह से काफी प्रयासों के बाद बात नहीं हो पाई।

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वर्तमान समय में करीब एक साल से अधिक समय से निलंबित किए गए अधिकारियों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। करीब एक साल पहले केंद्रीय कारागार नैनी से निलंबित किए गए वरिष्ठ अधीक्षक शशिकांत सिंह को अभी तक बहाल नहीं किया गया। जबकि इनके साथ ही निलंबित किए गए दो अधीक्षक बहाल कर दिए गए। इसी प्रकार बांदा जेल से निलंबित वीरेंद्र कुमार वर्मा और योगेश कुमार दो जेलरों को भी अभी तक बहाल नहीं किया गया है। हकीकत यह है कि विभाग में दक्षिणा देने वाले बहाल और नहीं देने वाले निलंबन में ही फंसे रहते हैं।

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